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फैक्ट चेक

लेबनान स्थित अमेरिकी बेस पर ईरानी हमले के दावे से AI जनरेटेड वीडियो वायरल

DeepFake-O-Meter और Was it AI जैसे डिटेक्शन टूल वीडियो के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाए जाने की पुष्टि करते हैं.

By -  Jagriti Trisha |

27 March 2026 7:01 PM IST

सोशल मीडिया पर लेबनान स्थित अमेरिकी बेस पर ईरानी हमले के दावे से एक वीडियो वायरल हो रहा है. बूम ने जांच में पाया कि यह वीडियो वास्तविक नहीं है.

वीडियो में मौजूद विसंगतियां और एआई डिटेक्टर टूल्स इसके AI जनरेटेड होने की पुष्टि करते हैं.

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच इजरायल लेबनान पर भी लगातार हमले कर रहा है. Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने लेबनान में हजारों सैनिक तैनात किए हैं. यहां मुख्य संघर्ष ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच है.

सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें मिसाइल हमला और उससे मची अफरातफरी को दिखाया गया है. एक फेसबुक यूजर ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, 'लेबनान में अमेरिकी बेस पर जब ईरानी मिसाइल गिरी तो अफरातफरी मच गई. अमेरिका अपने लेबनान बेस के बारे में सूचना को छुपा रहा है और होने वाले नुकसान को दुनिया के सामने नहीं आने देना चाहता.' (आर्काइव लिंक)

पड़ताल में क्या मिला:

वीडियो में है विसंगतियां

गौर से देखने पर वीडियो में ऐसी कई गड़बड़ियां नजर आती हैं जो किसी असली मिसाइल हमले की स्थिति से को नहीं दर्शातीं. उदाहरण के तौर पर मिसाइल गिरने की पूरी प्रक्रिया काफी काल्पनिक लगती है. हमले के बाद भी लोग उसी दिशा में भागते दिखते हैं. एक दृश्य में सैनिक के हाथ में दिख रहे हथियार का आकार बदलता हुआ नजर आता है और एक पल के लिए वह हवा में तैरता हुआ दिखाई देता है. ये सारी असंगतियां आमतौर पर एआई जनरेटेड कंटेंट में पाई जाती हैं.



एआई डिटेक्शन टूल्स ने की पुष्टि

पड़ताल के लिए हमने इस वीडियो का विश्लेषण DeepFake-O-Meter, Hive Moderation और Was it AI जैसे एआई डिटेक्शन टूल्स पर किया. DeepFake-O-Meter के Dual Label Deepfake Video Detection मॉडल ने वीडियो को 100 प्रतिशत फेक बताया. वहीं टूल Hive Moderation ने भी इसके AI जनरेटेड होने की संभावना 94.2 प्रतिशत जताई.



टूल Was it AI ने भी वीडियो के कुछ कीफ्रेम को एआई जनित करार दिया.



Deepfakes Analysis Unit में हमारे सहयोगियों ने अपने मैन्युअल एनालिसिस में बताया कि वीडियो में कई गड़बड़ियां दिखती हैं जैसे- मिसाइल का इंपैक्ट ऑनलाइन उपलब्ध असली फुटेज की तुलना में बहुत कमजोर मालूम होता है, सैनिकों की प्रतिक्रिया अवास्तविक है और धमाकों के बावजूद लोगों की आवाज साफ सुनाई देती है. इसके अलावा लोगों के शरीर की बनावट अजीब दिखती है जैसे- अंगों का गलत तरीके से मुड़ना या आकार बदलना.



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