फैक्ट चेक

कोल्हापुर में ट्रक में मिले 63 बच्चों के रोहिंग्या मुसलमान होने का गलत दावा वायरल

बूम ने पाया कि वायरल वीडियो 2023 का है, जब कोल्हापुर में पुलिस को एक ट्रक में 63 बच्चे मिले थे. ये बच्चे बिहार और बंगाल से थे, जो कोल्हापुर के एक मदरसे में पढ़ाई करते थे.

By - Jagriti Trisha | 6 Oct 2024 5:24 PM IST

कोल्हापुर में ट्रक में मिले 63 बच्चों के रोहिंग्या मुसलमान होने का गलत दावा वायरल

सोशल मीडिया पर ट्रक में मिले बच्चों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसके साथ दावा किया जा रहा है कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रोहिंग्या मुसलमानों को ले जा रहा ट्रक पकड़ा गया है, जिन्हें ममता बनर्जी बांग्लादेश से लाकर पूरे देश में भर रही हैं.

बूम ने अपने फैक्ट चेक में पाया कि वायरल दावा गलत है. वीडियो 2023 का है, जब महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक ट्रक में 63 बच्चे मिले थे. ये बच्चे कोल्हापुर के अजरा स्थित एक मदरसे में पढ़ते थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वे बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा से थे, जो छुट्टियों में अपने गांव गए हुए थे. छुट्टियां खत्म होने के बाद ये बच्चे ट्रेन से कोल्हापुर तक आए थे, जिसके बाद उन्हें ट्रक में लादकर मदरसा ले जाया जा रहा था.

लगभग 2 मिनट के इस वायरल वीडियो में एक ट्रक में एकसाथ कई बच्चों को देखा जा सकता है. इन बच्चों को पुलिसकर्मी ट्रक से उतारते नजर आ रहे हैं.

एक्स पर इस पुराने वीडियो को शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, 'महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रोहिंग्या मुसलमानों को ले जा रहा एक ट्रक पकड़ा गया. ममता बनर्जी उन्हें बांग्लादेश से लाकर पूरे देश में भर रही हैं. हम हिंदू कब जागेंगे? देश बहुत बड़े खतरे में है. सावधान हिंदू बंधु सावधान रहें.'


पोस्ट का आर्काइव लिंक.

फेसबुक पर भी यह वीडियो इन्हीं गलत दावों के साथ वायरल है.


पोस्ट का आर्काइव लिंक.

फैक्ट चेक: वायरल वीडियो पुराना है

वायरल वीडियो के कीफ्रेम को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें टीवी9 भारतवर्ष की एक रिपोर्ट मिली. 18 मई 2023 की इस रिपोर्ट में वायरल वीडियो के विजुअल्स मौजूद थे. 

रिपोर्ट में बताया गया कि कोल्हापुर में एक ट्रक में 63 बच्चे पाए गए थे. ये सभी बच्चे पश्चिम बंगाल और बिहार की सीमा से लाए गए थे. प्रारंभिक जांच में पता चला कि वे पास के एक मदरसे में पढ़ते थे. गर्मी की छुट्टी में वे अपने गांव गए थे. छुट्टियां बिताकर वापस लौटने के क्रम में पहले वे ट्रेन से रेलवे स्टेशन तक पहुंचे थे, जिसके बाद उन्हें ट्रक में लादकर मदरसा ले जाया जा रहा था.



ट्रक में पाए गए बच्चे रोहिंग्या मुसलमान नहीं हैं

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ हिंदूवादी संगठनों को ट्रक में बच्चों के होने की भनक लगी तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी. पुलिस ने पड़ताल की और उनके पास से मिले दस्तावेजों को खंगाला तो पाया कि अधिकतर बच्चे बंगाल व बिहार के रहने वाले थे. इस क्रम में पुलिस ने मदरसे के मौलाना को भी तलब किया था.

मौलाना ने बच्चों के बारे में पूरा विवरण देते हुए बताया कि ये बच्चे उनके मदरसे में पढ़ाई करते हैं. वे गर्मी की छुट्टी बिताने अपने गांव गए थे. वहां से वह रेलवे स्टेशन तक ट्रेन से आए थे, जहां से उन्हें ट्रक में भर कर मदरसा लाया जा रहा था.

रिपोर्ट में कोल्हापुर के तत्कालीन डिप्टी एसपी मंगेश चव्हाण के हवाले से भी इसकी पुष्टि की गई थी कि बच्चे कोल्हापुर के एक मदरसे में पढ़ाई करते थे और गर्मी की छुट्टी बिताकर अपने मूल गांव से वापस लौटे थे.

इसके अलावा, कोल्हापुर में ट्रक में 63 बच्चे पाए जाने से संबंधित कीवर्ड्स सर्च करने पर हमें इंडिया टीवी, जी न्यूज और दैनिक दिव्य मराठी की भी रिपोर्ट मिली. इन सभी रिपोर्ट्स में भी बताया गया था कि बच्चे बिहार-बंगाल के रहने वाले थे, जो कोल्हापुर से अजारा स्थित मदरसे में पढ़ते थे. इन्हें कोल्हापुर से मदरसा ट्रक में भर के लाया जा रहा था. 

पंजाब केशरी और IANS TV के यूट्यूब चैनल भी पर वायरल वीडियो के विजुअल्स के साथ संबंधित खबर देखी जा सकती है.

IANS TV के अनुसार, पुलिस को पहली नजर में यह चाइल्ड ट्रैफिकिंग का मामला लगा था. लेकिन पड़ताल में यह साफ हो गया कि ये 63 बच्चे बिहार और बंगाल से महाराष्ट्र में मदरसों में धार्मिक शिक्षा लेने के लिए आए थे. इस रिपोर्ट में तत्कालीन पुलिस उपअधीक्षक मंगेश चव्हाण का बयान भी शामिल है. 

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