बांग्लादेश में हिन्दुओं को खाद्य पदार्थ की मनाही का वीडियो भारत का बता कर किया गया वायरल

बूम ने पाया की असली घटना अप्रैल 3, 2020 को बांग्लादेश के सिलहट हुई थी जहाँ एक स्थानीय नेता ने ज़रूरतमंद हिंदुओं में खाद्य सामग्री बाँटने से मना किया था|

इस वीडियो में बांग्लादेश की एक मस्जिद दिख रही है, जहाँ राहत सामग्री बांटी जा रही है| यहाँ पर एक स्थानीय नेता के कहने पर उन हिंदुओं को सामग्री देने से मना किया गया जिनका नाम लिस्ट में नहीं था| इस वीडियो को भारत का बता कर सोशल मीडिया पर वायरल जा रहा है| वीडियो में चल रहे लॉक-डाउन के दौरान मस्जिद के सदस्यों को राशन से भरे थैलो का वितरण करते देखा जा सकता है।

कुछ ही मिनटों में वीडियो में यह देखने को मिलता है की मस्जिद सदस्य घोषणा करते है की जिन हिंदुओं का नाम सूचि में नहीं है, वे राहत सामग्री लेने ना आएं| बूम ने पता लगाया की यह वीडियो बांग्लादेश के सिलहट का है जहाँ एक स्थानीय नेता को राहत सामग्री बाँटने के दौरान मज़हबी भेदभाव का आरोपी ठहराया गया था | बांग्लादेश में मार्च 26, 2020 से पूर्ण रूप से लॉक-डाउन है|

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करीब छ: सेकंड पर वीडियो में एक मस्जिद सदस्य बांग्लादेशी बोली में यह कहते सुना जा सकता है की: "जिन हिंदुओं का नाम सूचि में नहीं है वे नहीं आएँगे |"

वायरल वीडियो को फ़ेसबुक पर इस कैप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है: "एक मस्जिद से खाद्य सामग्री बाँटी जा रही थी, कुछ ज़रूरतमंद हिन्दु वहाँ पहुँच गये पर उसको यह कहकर भगा दिया गया की यहाँ पर हिंदुओं के लिये कोई व्यवस्था नहीं है |"

इसके अलावा वीडियो को बंगाली भाषा में भी शब्दों से मढ़ा पाया जा सकता है जिसमें हिन्दुओं को उनकी धार्मिक पहचान की तर्ज पर राहत सामग्री से वंचित रखने की बात कही गयी है | यह इस तरह हिंदी में अनुवादित है: "इन लाचार हिंदुओं को राहत सामग्री इसलिए नहीं मिली क्योंकि वह हिन्दु है | बांग्लादेश मेरी मातृभूमि है | (हमें) ना तो पाकिस्तान में मिली नाही बांग्लादेश में | 2.55 मिनट पर ध्यान दीजिये |"

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(बंगाली में वास्तविक कैप्शन : শুধু হিন্দু হওয়ার অপরাধে ত্রান পেলোনা অসহায় হিন্দুরা; বাংলাদেশ আমার জন্মভুমি!! পাকিস্তানেও পায়নি আর বাংলাদেশেও দেখা লাগল। ২.৫৫ মিনিটে খেয়াল করুন।)

पोस्ट का आर्काइव वर्शन यहाँ पाए |

बंगाली में लिखे शब्द यह साफ़ कर देते है की वीडियो बांग्लादेश से है, उन्हें चालाकी से हटाकर कई पोस्ट में हिंदी के शब्दों से बदल दिया गया है | इन्हीं पोस्ट्स को फिर भारत में हुई घटना का बताकर शेयर किया जा रहा है |

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फ़ैक्ट चेक

इससे जुड़े कीवर्ड्स सर्च के ज़रिये बूम को पता चला की यह वीडियो यूट्यूब पर भी अप्रैल 5, 2020 को अपलोड किया गया था | बंगाली में लिखे इस वीडियो का कैप्शन हिंदी में इस प्रकार है: "हिंदुओं को कोई राहत सामग्री नहीं बांटी जाएगी | हिन्दू घर चले जाये | सिलहट "

(असली कैप्शन : হিন্দুদের ত্রাণ দেওয়া হবে না, হিন্দুরা বাড়ি চলে যাও। সিলেট )

हमें सिलहट मिरर में अप्रैल 4, 2020 में प्रकाशित यह न्यूज़ रिपोर्ट भी मिली | इस रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना ओस्मानीनगर, सिलहट जहाँ हिंदुओं को क्षेत्र को आवंटित राहत फण्ड नहीं मिला था |


यह घटना अप्रैल 3, 2020 को शुक्रवार की नमाज़ के बाद हुई | राहत सामग्री बाँटने की प्रक्रिया कमरुल इस्लाम नामक युवक के नेतृत्व में की जा रही थी जिनकी पहचान सूचि में लिखे नामों को पढ़ने वाले शख़्स के तौर पर हुई | इस्लाम बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी के नेता और सिलहट इलाके में मौजूद पल्ली विद्युत् समिति के निदेशक है |

इस रिपोर्ट के अनुसार यह वीडियो एक फ़ेसबुक लाइव का हिस्सा है जो बाद में वायरल हो गया |

रिपोर्ट यह भी बताती है की राहत सामग्री वितरण की प्रक्रिया प्रशासन से बिना अनुमति के हुई थी क्योंकि लोगो को इस तरह के विशाल सम्मेलन को मस्जिद के सामने इकठ्ठा होने की कोई इजाज़त नहीं दी गयी थी | उप ज़िला निर्बाही अधिकारी, मोसम्मत तहमीना अख़्तर ने इस घटना को भेदभाव पूर्ण कहा और ओस्मानीनगर के पुलिस स्टेशन प्रभारी अधिकारी, रशीद मोबारक को घटना की छान-बीन करने के निर्देश दिए |

इस्लाम ने अप्रैल 5, 2020 को एक बयान दिया जिसमें उन्होंने घटना पर खेद जताते हुए कहा की राहत सामग्री हिंदुओं को घर-घर जाकर या उचित स्थानों पर कानून एवं व्यवस्था का पालन करते हुए मुहैया कराई जाएगी | उन्होंने यह भी अपील की कि कोई भी असामंजस्य पैदा ना करें जिसे सिलहट वॉइस ने रिपोर्ट किया | उसी लेख में हिंदुओं की सूचि भी प्रकाशित की गयी |

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Claim Review :   वीडियो दिखाता है की भारत में हिंदुओं को मस्जिद के बाहर बट रही राहत सामग्री लेने की मनाही है
Claimed By :  Facebook posts
Fact Check :  False
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