यूजीसी की नई गाइडलाइंस को लेकर चल रहे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का एक बयान वायरल है. इसमें उनके हवाले से कहा गया कि सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग है.
बूम ने जांच में पाया कि वायरल दावा भ्रामक है. मोहन यादव का यह बयान करीब सात-आठ साल पुराना है. तब उज्जैन दक्षिण से भाजपा विधायक मोहन यादव मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं थे.
मोहन यादव ने 2018 में एससी-एसटी संशोधन विधेयक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में यह बात बोली थी. हालांकि बाद में सफाई देते हुए कहा था कि मीडिया ने उनके बयान को काट-छांटकर चलाया.
गौरतलब है कि सामान्य वर्ग के लोगों द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नई गाइडलाइंस के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी है.
सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?
सोशल मीडिया पर मोहन यादव का यह पुराना बयान यूजीसी की नई गाइडलाइंस को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर वायरल हो रहा है.
फेसबुक के एक पोस्ट में एक यूजर ने लिखा, "यूजीसी के विरोध में सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग- मोहन यादव, मूर्ख मंत्री म०प्र०..." (आर्काइव लिंक)
एक्स पर एक यूजर ने इस बयान से संबंधित बंसल न्यूज की वीडियो रिपोर्ट के स्क्रीनशॉट को शेयर किया. इस स्क्रीनशॉट में मध्यप्रदेश सीएम की तस्वीर के साथ लिखा है, "सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग: मोहन यादव." (आर्काइव लिंक)
इंस्टाग्राम पर भी एक रील में एक यूजर ने इसी स्क्रीनशॉट के हवाले से तंज कसते हुए कहा, "सवर्णों को फंडिंग कहां से हो रही थी भाई मुझे तो कुछ नहीं मिला." (आर्काइव लिंक)
पड़ताल में क्या मिला:
वायरल बयान साल 2018 का है
बंसल न्यूज की वीडियो रिपोर्ट के वायरल स्क्रीनशॉट में 20 सितंबर की तारीख दर्ज है और मोहन यादव को बीजेपी विधायक बताया गया है. इससे हमें संकेत मिला कि मोहन यादव का यह बयान उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले का है. आगे फेसबुक पर हमें 20 सितंबर 2018 को पोस्ट की गई इस स्क्रीनशॉट की वीडियो रिपोर्ट भी मिली. (आर्काइव लिंक)
रिपोर्ट में मोहन यादव को उज्जैन से विधायक के रूप में संबोधित किया गया था. मोहन यादव ने एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए कहा था कि सवर्ण आंदोलनों के पीछे विदेशी फंडिंग हैं. इसमें उनका मूल बयान मौजूद है.
बता दें कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद मोहन यादव को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया था.
एससी-एसटी एक्ट को लेकर हो रहा था विरोध प्रदर्शन
मोहन यादव के इस विवादित बयान पर दैनिक भास्कर, पत्रिका न्यूज और जी मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ की 20 सितंबर 2018 की रिपोर्ट देखी जा सकती है. इन रिपोर्ट के मुताबिक एससी-एसटी एक्ट के विरोध में हो रहे आंदोलनों पर मोहन यादव ने कहा था कि सिमी और इस्लामिक कट्टरपंथी हिंदू समाज को बांटने की साजिश रच रहे हैं. देश में समाज को तोड़ने की साजिश की जा रही है और विदेशी ताकतें फूट डालकर समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं.
इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा था कि सवर्ण आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग है. जी न्यूज की रिपोर्ट में मोहन यादव का ऐसा ही एक बयान देखा जा सकता है.
तब मध्यप्रदेश समेत देशभर में एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के विरोध में जगह-जगह सवर्ण समाज के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे. मोहन यादव के इस बयान के बाद करणी सेना ने उनके कार्यालय के बाहर धरना दे दिया और उनके बयान पर सवाल उठाए थे. इसपर सफाई देते हुए मोहन यादव ने कहा था कि वह सवर्ण समाज या करणी सेना के बारे में ऐसा नहीं कह सकते. उनके बयान को काट-छांट कर पेश किया जा रहा है.
उन्होंने विवाद बढ़ने के बाद इस संबंध में एक पोस्ट भी किया था और खंडन करते हुए कहा था कि कुछ चैनलों पर सवर्ण और करणी सेना को लेकर मेरे हवाले से झूठी जानकारी दी गई.
इसके अलावा मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग ने भी एक्स पर वायरल हो रहे इस दावे का खंडन किया है.


