सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी वायरल है, जिसमें दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश में समोसा खाने के लिए लोको पायलट ने एक ट्रेन रोक दी. वीडियो में एक शख्स पास की दुकान से समोसा खरीदकर क्रॉसिंग पर रुकी ट्रेन (इंजन) के भीतर ले जाता नजर आ रहा है.
हालांकि रतलाम डीआरएम और वेस्टर्न रेलवे ने वायरल हो रहे दावों का खंडन करते हुए कहा कि यह लोको नंबर 27237/27600 की मालगाड़ी थी, जिसे राऊ होम सिंग्नल पर निर्धारित इंजीनियरिंग कार्य के चलते रोका गया था.
वायरल दावा क्या है?
इस 50 सेकंड के वीडियो के बैकग्राउंड में सुनाई दे रहे वॉयसओवर में एक शख्स दावा कर रहा है कि रेलवे स्टाफ ने समोसे लेने के लिए पूरी ट्रेन रोक दी. वीडियो में कथित स्टाफ के इंजन पर चढ़ने के तुरंत बाद ट्रेन को चलते हुए भी देखा जा सकता है.
वीडियो को इंदौर-महू रूट पर चलने वाली डेमू ट्रेन का बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि यह ट्रेन राऊ के रंगवासा क्षेत्र में समोसे लेने के लिए रोकी गई थी. (आर्काइव लिंक)
एनडीटीवी, आजतक और टीवी9 भारतवर्ष समेत कई मीडिया आउटलेट ने भी वीडियो को इसी दावे के साथ प्रकाशित किया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने भी शुरुआती जानकारी के आधार पर इस वीडियो को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया था. हालांकि बाद में स्पष्टीकरण जारी करते हुए पीटीआई ने इस पोस्ट को हटा लिया.
भारतीय रेल ने किया खंडन
एक्स पर वायरल पोस्ट के जवाब में रतलाम डिवीजन (DRM Ratlam) ने अपने आधिकारिक हैंडल से इस दावे का खंडन हुए स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रही ट्रेन लोको नंबर 27237/27600 की एक मालगाड़ी (CGPT) है, जिसे राऊ यार्ड में ट्रैक पर निर्धारित इंजीनियरिंग कार्य के कारण होम सिग्नल पर रोका गया था.
रेलवे ने आगे बताया कि इस ट्रेन को खाना खरीदने के उद्देश्य से नहीं रोका गया. वीडियो को गलत इरादे से साझा किया जा रहा है और मालगाड़ी के रुकने को भ्रामक तरीके से पैसेंजर DEMU ट्रेन का बताया जा रहा है.
यह पैसेंजर ट्रेन नहीं बल्कि मालगाड़ी थी
DRM Ratlam और वेस्टर्न रेलवे के एक्स हैंडल पर इससे संबंधित 8-9 जुलाई के अन्य पोस्ट भी देखे जा सकते हैं, जिनमें वायरल दावों को भ्रामक बताते हुए लिखा गया कि नियमों के अनुसार कॉनकोर ग्रीन फील्ड प्राइवेट टर्मिनल की मालगाड़ी को राऊ होम सिग्नल पर तय इंजीनियरिंग काम के चलते रोका गया था. इस तय स्टॉपेज के दौरान ही असिस्टेंट लोको पायलट को खाने-पीने की चीजें खरीदते हुए देखा गया.
इसमें भी स्पष्ट किया गया कि इस वीडियो को गलत तरीके से एक पैसेंजर DEMU ट्रेन से जोड़ा जा रहा है जबकि यह घटना एक मालगाड़ी से जुड़ी है.
रतलाम डिवीजन के PRO ने बताई सच्चाई
रतलाम डिवीजन के PRO मुकेश कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए बताया, "यह राऊ यार्ड की घटना है. सामान खरीदने के लिए ट्रेन रोकने का दावा पूरी तरह बेबुनियाद है. ट्रेन को इसलिए रोका गया था क्योंकि आगे इंजीनियरिंग कार्य चल रहा था और सिग्नल नहीं मिला था."
उनके मुताबिक वायरल वीडियो में इंजन के बाहर दिखाई देने वाला स्टाफ स्पेयर ड्राइवर था. मुख्य लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट लोकोमोटिव के अंदर ही मौजूद थे. उन्होंने इस दावे का भी खंडन किया कि उस जगह पर ट्रेनें प्रतिदिन रोकी जाती हैं. उनके अनुसार किसी भी ट्रेन का रुकना पूरी तरह सिग्नल मिलने और परिचालन संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर करता है.


