भुवनेश्वर में निष्कासन के वीडियो को जोड़ा जा रहा है यूपी में एंटी-सीएए विरोध से

बूम ने पाया कि वीडियो भुवनेश्वर नगर निगम द्वारा अवैध अतिक्रमण के ख़िलाफ चलाए गए निष्कासन अभियान का एक हिस्सा है।

एक बेदखली अभियान के तहत ओडिशा के भुवनेश्वर में सब्जी और फलों की गाड़ियों को तोड़ने का वीडियो झूठे दावों के साथ वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश का है।

वीडियो में एक विशाल एक्सकैवेटर दिखाया गया है जो फलों और सब्जियां ले जाने वाली लकड़ी की गाड़ियों को तोड़ रहा है। अधिकारी इस काम का निरीक्षण कर रहे हैं। एक-एक कर गाड़ियां तोड़ी जा रही हैं। भीड़ खड़ी इस पूरी विध्वंस प्रक्रिया को देख रही है। यह वीडियो फ़ेसबुक पर भी वायरल है। इस फ़ैक्ट चेक को लिखे जाने तक इस वीडियो को य 13,000 से अधिक बार देखा गया और 755 से ज्यादा बार शेयर किया गया है।

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इस वीडियो के साथ दिए गए कैप्शन में लिखा है, "गरीबी मुक्त भारत बनाने की तैयारी। उत्तर प्रदेश से शुरू।"

वीडियो का अर्काइव वर्शन देखने के लिए यहां क्लिक करें। यही वीडियो ट्विटर पर इस दावे के साथ फैलाया जा रहा है कि यह विध्वंस अभियान नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध का परिणाम है।

फ़ैक्ट चेक

बूम यह पता लगाने में सक्षम था कि वीडियो उत्तर प्रदेश का नहीं है, क्योंकि वीडियो में खड़े लोग जिस बोली में बात कर रहे हैं वह उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल होने वाली बोली के समान नहीं है। प्रासंगिक कीवर्ड खोजों पर, हमें एक ओडिया समाचार चैनल बुलेटिन ओटीवी से फुटेज मिला जिसमें वही क्लिप शामिल है जो सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में है।

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समाचार रिपोर्ट के अनुसार, यह एक निष्कासन प्रक्रिया का हिस्सा था जो इस साल जनवरी में भुवनेश्वर की यूनिट 1 मार्केट में आयोजित किया गया था।

बूम ने दोनों वीडियो के कई फ्रेमों का मिलान किया जो इस बात को पुष्ट करते हैं कि घटना भुवनेश्वर में एक निष्कासन अभियान की है। नीचे दीवार की तरह संरचना की तुलना की गई है, जो ध्वस्त गाड़ियों के ढेर के पीछे देखा जा सकता है, एक्सकैवेटर और सुपरवाइजर को दोनों वीडियो में देखा जा सकता है।( एक्सकैवेटर जो दोनों वीडियो में दिखाई देते हैं। )

( एक्सकैवेटर जो दोनों वीडियो में दिखाई देते हैं। )

निष्कासन ड्राइव के समान सुपरवाइज़रों को दोनों वीडियो में देखा जा सकता है।


1 मिनट 52 सेकंड के निशान पर, काले रंग की टी-शर्ट में एक आदमी को एक हरे रंग की गाड़ी को एक्सकैवेटर की ओर धक्का देते हुए देखा जा सकता है, जबकि एक अन्य शख़्स इसका निरीक्षण करता है। वीडिय में उसी शख़्स को 25 सेकंड के निशान पर देखा जा सकता है।


इसके अलावा, एक ही वायरल वीडियो भुवनेश्वर और नई दिल्ली से प्रकाशित एक पाक्षिक समाचार द न्यूज इनसाइट (टीएनआई) द्वारा ट्वीट किया गया था, जिसमें बताया गया था कि यह घटना ओडिशा की राजधानी के यूनिट 1 बाजार में की थी। इसे एक स्थानीय समाचार पोर्टल के फ़ेसबुक पेज पर भी पोस्ट किया गया था।


पिछले कुछ महीनों में असंबंधित निष्कासन ड्राइव के कई वीडियो नागरिकता अधिनियम से ग़लत तरीके से जोड़े गए हैं।

एक ऐसे दावे के लिए बूम द्वारा किया गया फ़ैक्ट चेक पढ़ें।

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Claim Review :  वीडियो में उत्तर प्रदेश में गरीबों पर निष्कासन कार्यवाही दिखाई गयी है
Claimed By :  Facebook and Twitter handles
Fact Check :  False
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