असम पुलिस ने उन लोगों की पिटाई की जो एनआरसी में नहीं हैं? फ़ैक्ट चेक

बूम ने पाया कि वीडियो मूल रूप से 2017 में असम के अमचंग वन क्षेत्र में किए गए वन बेदखली अभियान का है।

2017 में असम में एक निष्कासन अभियान के दौरान पुलिस कार्यवाही का वीडियो झूठे दावे के साथ वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि पुलिस उन लोगों पर कार्यवाही कर रही है जिनके नाम राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) में शामिल नहीं हैं|

वीडियो में पुलिस लोगों को उनके टूटे हुए घरों से बाहर खींचती है। सशस्त्र पुलिसकर्मी पुरुषों और महिलाओं को खींच रहे हैं और बैकग्राउंड में मदद की पुकार सुनी जा सकती है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एनआरसी के ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर यह क्लिप फिर वायरल हो रही है।

नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स एक सरकारी पंजीकरण दस्तावेज है जिसमें असम के भारतीय नागरिकों के नाम और प्रासंगिक जानकारी शामिल है। असम में यह लागू होने के बाद, एनआरसी आगे अल्पसंख्यकों को अवैध आप्रवासियों के रूप में वर्गीकृत करना चाहता है, जिससे कई लोग चिंतित हैं।

वायरल वीडियो के साथ दिए गए कैप्शन में लिखा है, "#NRC में नाम नहीं है इसलिए घर से उठाया जा रहा है #Assam; आज आपका विरोध बंद हो जाए तो कल आपका हाल ऐसा ही होगा।"

इस लेख को लिखे जाने तक इस क्लिप को 2.1 लाख से ज्यादा बार देखा गया है।

यही वीडियो एक अन्य फ़ेसबुक पेज पर ऐसी ही कहानी के साथ वायरल है। इसे 2.6 लाख से ज्यादा बाद देखा गया है।

फ़ैक्ट चेक

बूम ने पाया कि वीडियो मूल रूप से असम पुलिस द्वारा एक जंगल बेदखली अभियान से है जो नकली कहानी के साथ फैलाया जा रहा है। हमने वीडियो को कीफ़्रेम में तोड़ा और इसके कुछ फ्रेम पर रिवर्स इमेज सर्च किया। हम यूट्यूब पर इसी वीडियो के एक लंबे वर्शन तक पहुंचे, जिसे इस साल मई में अपलोड किया गया था।

हम तब वॉटरमार्क के माध्यम से यह पता लगाने में सक्षम थे कि फुटेज एक स्थानीय असमिया समाचार चैनल DY 365 के समाचार बुलेटिन से है।

निम्नलिखित कैप्शन के साथ DY 365 चैनल के आधिकारिक फ़ेसबुक पेज पर यही वीडियो अपलोड किया गया है। "अमचंग वन्यजीव अभयारण्य में बेदखली अभियान का दूसरा दिन जारी है, कंगना नगर में एक भयावह घटना हुई। इस्माइल हक के रूप में पहचाने जाने वाले एक नाराज प्रदर्शनकारी ने बेदखली के बीच एक धारदार हथियार से हमला किया। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की ...इसके बाद ... "

यह घटना दिसंबर 2017 में असम के अमचंग वन क्षेत्र में हुई थी।

बूम ने न्यूज चैनल के एक डेस्क एडिटर से भी संपर्क किया जिन्होंने इस घटना की पुष्टि की।

समाचार रिपोर्टों के अनुसार 700 से ज्यादा परिवारों को बेघर किया गया। आगे पढने के लिए यहां क्लीक करें।

वायर का एक अंश निम्नलिखित बताता है।

"अमचंग आरक्षित वन, दक्षिण मचंग वन आरक्षित और खानापारा आरक्षित वन को एक साथ रखकर, राज्य के कामरूप जिले में स्थित अमचंग को 2004 में राज्य सरकार द्वारा एक वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। जिस क्षेत्र में लगातार तीन दिनों तक निष्कासन अभियान देखा गया है, उसे केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) द्वारा स्थापित, विशेषज्ञ समिति द्वारा पिछले जून में ईसीजेड घोषित किया गया था।"

Claim Review :  वीडियो दिखाता है कि पुलिस उन लोगों को उठाती है जिनके नाम एनआरसी में पंजीकृत नहीं हैं
Claimed By :  Facebook Pages
Fact Check :  False
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