राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की तस्वीर के साथ भ्रामक दावा वायरल

राष्ट्रपति कोविंद की एक तस्वीर भ्रामक दावे के साथ वायरल है, जानिए सच क्या है.

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद 27 जून को अपने गृहक्षेत्र उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात स्थित परौंख पहुँचे. उनके स्वागत सत्कार के तगड़े इंतज़ाम किये गये थे. राष्ट्रपति ने जब हेलीकाप्टर से उतरकर अपने जन्मस्थली की ज़मीन पर पैर रखा तो उन्होंने सबसे पहले झुककर ज़मीन को छुआ. तस्वीर कई अखबारों में पूरी खबर के साथ छपी.

हालांकि यही तस्वीर कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने एक फ़र्ज़ी दावे के साथ भी शेयर की है.

फ़ेसबुक पर एक यूज़र ने इसे शेयर किया और आरक्षण सहित तमाम मुद्दों पर इस फ़ोटो के हवाले से टिप्पणी की.

वायरल पोस्ट के साथ लिखा कैप्शन कहता है 'एक बार जिलाधिकारी कार्यालय में कुछ काम कराना था , जिलाधिकारी महोदय दलित थे। एक परिचित मिले , पंडित जी को अपनी समस्या बताया तो बोले कि अरे चलो मेरे साथ मैं बोल देता हूँ। मैं उनके साथ जैसे ही जिलाधिकारी के आफिस में पहुँचा , दलित जिलाधिकारी उस पंडित जी के सामने लगभग दंडवत हो गये , 10 फिट दूर से पैर छूने के अंदाज में दिखे। पंडित जी उनके गाँव के ही थे। कहने का अर्थ यह है कि दलितों को आरक्षण नहीं सोच और स्वभाव बदलने की ज़रूरत है। आज महामहिम के इस चित्र को देखकर घटना याद आ गयी। गुलामी की मानसिकता जल्दी पीछा नहीं छोड़ती।'

कवीन्द्र कुलकर्णी नाम के एक यूज़र ने इसे फ़ेसबुक पर शेयर करते हुए फ़र्ज़ी दावा किया.


(पोस्ट यहाँ देखें)

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फ़ैक्ट चेक

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद इन दिनों अपने गृहनगर की यात्रा पर हैं. ये तस्वीर उसी यात्रा की है जब राष्ट्रपति अपने हेलीकाप्टर से उतर कर अपनी जन्मभूमि परौंख (कानपुर देहात) में कदम रखते हैं. राष्ट्रपति कोविंद के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ये तस्वीर पोस्ट की गई और लिखा कि 'उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गांव के पास हेलीपैड पर उतरकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक दुर्लभ भावपूर्ण भाव में अपनी जन्मभूमि पर नतमस्तक होकर मिट्टी का स्पर्श किया.'

राष्ट्रपति की इस तस्वीर को ANI सहित कई मीडिया संस्थानों ने चलाया और लिखा कि राष्ट्रपति ने अपने गाँव पहुँचकर सबसे पहले वहाँ की मिट्टी को नमन किया. राष्ट्रपति के स्वागत में पहुचें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल भी फ़ोटो में मौजूद दिख रहे हैं.

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राष्ट्रपति 27 जून को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुँचे जहां से एक स्पेशल ट्रेन के ज़रिये उन्होंने अपने पैतृक निवास तक का सफ़र किया. राष्ट्रपति ने वहाँ कई सभाओं को भी संबोधित किया. लोगों से वैक्सीन लगवाने और मास्क पहनने की अपील भी की. राष्ट्रपति कई बार अपने गाँव और बचपन के दिनों को याद कर भावुक हुए.


Updated On: 2021-06-29T16:02:38+05:30
Claim :   कहने का अर्थ यह है कि दलितों को आरक्षण नहीं सोच और स्वभाव बदलने की ज़रूरत है। आज महामहिम के इस चित्र को देखकर घटना याद आ गयी। गुलामी की मानसिकता जल्दी पीछा नहीं छोड़ती।
Claimed By :  social media
Fact Check :  Misleading
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