आंबेडकर की प्रशंसा में बोलते पीएम मोदी का वीडियो UGC से जोड़कर वायरल
बूम ने जांच में पाया कि पीएम मोदी का वीडियो क्रॉप्ड है, मूल वीडियो में वह आंबेडकर में जातीय भेदभाव के खिलाफ बदले की भावना न होने की बात कहते हुए उन्हें महापुरुष कह रहे थे.

सोशल मीडिया पर पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण की क्लिप यूजीसी से जोड़ते हुए भ्रामक दावे से शेयर की जा रही है. वीडियो में पीएम को जातीय भेदभाव और छुआछूत पर बोलते हुए सुना जा सकता है. इस अधूरे वीडियो को इस संदर्भ में शेयर किया जा रहा है कि पीएम जातीय भेदभाव के खिलाफ बदले की बात कह रहे हैं.
बूम ने जांच में पाया कि पीएम मोदी के भाषण का 10 साल पुराना वीडियो भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है. मूल वीडियो में वह आंबेडकर के व्यक्तित्व की सराहना कर रहे थे.
भारत में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए थे. ये नियम 2012 में लागू किए गए नियमों की जगह जारी किए गए थे. मुख्यतः सामान्य श्रेणी में आने वाली जातियों ने इन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों पर रोक लगा दी है और यूजीसी को नियमों को दोबारा ड्राफ्ट करने का आदेश दिया है.
क्या है वायरल दावा :
फेसबुक यूजर ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, "रूपरेखा तो पहले से ही तैयार हो गई थी…UCC कहते रहे और ले आए UGC #UGCRegulations को लेकर मोदी सरकार सामान्य श्रेणी वालों की नाराजगी को बैरोमीटर पर नाप रही है…" आर्काइव लिंक
एक्स पर भी यह वीडियो वायरल है. आर्काइव लिंक
पड़ताल में क्या मिला :
2016 का वीडियो
वायरल वीडियो के कीफ्रेम को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें भारतीय जनता पार्टी के यूट्यूब चैनल पर 21 मार्च 2016 को अपलोड किया गया वीडियो मिला. पीएम ने 21 मार्च 2016 को दिल्ली में आंबेडकर नेशनल मेमोरियल की आधारशिला रखी थी. इसी दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित किया था.
भ्रामक दावे से शेयर किया जा रहा क्रॉप्ड वीडियो
अपने भाषण में आंबेडकर के बारे में बोलते हुए मोदी 36:05 की अवधि पर कहते हैं, "आप कल्पना कर सकते हो कि एक महापुरुष जिसको इतना जुल्म सहना पड़ा, जिसका बचपन अन्याय, उपेक्षा और उत्पीड़न से बीता हो, जिसने अपनी मां को अपमानित होते देखा हो, मुझे बताओ ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा."
"तुम मुझे पानी नहीं भरने देते थे, तुम मुझे मंदिर नहीं जाने देते थे, तुम मेरे बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने से मना करते थे, मनुष्य का जो स्तर है वहां यह बहुत स्वाभाविक है लेकिन जो मानव से कुछ ऊपर है वह बाबा साहेब आंबेडकर थे, जब उनके हाथ में कलम थी, कोई भी निर्णय करने की ताकत थी लेकिन आप पूरा संविधान देख लीजिए, पूरी संविधान सभा की डिबेट देख लीजिए, बाबा साहेब अंबेडकर की बातों में, वाणी में, शब्दों में कहीं कटुता नजर नहीं आती है, बदले का भाव नजर नहीं आता है..."




