सोशल मीडिया पर ईरान और वेनेजुएला में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर दो एआई जनरेटेड वीडियो वायरल हो रहे हैं. यूजर्स इन वीडियो को वास्तविक मानकर शेयर कर रहे हैं.
बूम ने जांच में पाया कि ये दोनों वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किए गए हैं. कई एआई डिटेक्टर टूल्स और वीडियो के क्रिएटर इनके एआई से बने होने की पुष्टि करते हैं.
गौरतलब है कि ईरान में आर्थिक संकट को लेकर करीब 15 दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक लगभग 500 लोगों की मौत हो चुकी है. अर्थव्यवस्था की बदहाल स्थिति के खिलाफ राजधानी तेहरान से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन अब देश के 186 शहरों तक फैल चुके हैं.
वहीं वेनेजुएला में 3 जनवरी 2026 को अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद से हालात अस्थिर बने हुए हैं. राजधानी काराकस में राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों द्वारा रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने की खबरें सामने आईं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी बीच वेनेजुएला में कुछ लोगों द्वारा मादुरो की गिरफ्तारी के बाद जश्न मनाए जाने की घटनाएं भी देखी गईं.
सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?
ईरान और वेनेजुएला में जारी उठा-पटक के बीच सोशल मीडिया पर यूजर्स वहां हो रहे प्रदर्शनों से जोड़कर कुछ वीडियो शेयर कर रहे हैं.
ईरान के दावे से शेयर किए जा वीडियो में मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाकर भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे दिख रहे हैं. इसको शेयर करते हुए लोग अंग्रेजी कैप्शन में दावा कर रहे हैं कि सरकार ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को छिपाने के लिए स्ट्रीट लाइट बंद कर दीं, लेकिन सभी ने यह दिखाने के लिए अपने फोन की लाइट का इस्तेमाल किया कि वे राजधानी में हैं. (आर्काइव लिंक)
एक्स और फेसबुक पर इसे साझा करते हुए भारतीय यूजर्स ने इसके हिंदी कैप्शन में लिखा, "ईरान के 18 बड़े शहरों का करीब 17 लाख सामान्य नागरिक सड़कों पर है..!!" (आर्काइव लिंक)
वहीं वेनेजुएला के दावे से वायरल हो रहे वीडियो में एक सड़क पर हजारों की संख्या में लोग राष्ट्रीय झंडे के साथ सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया गया कि यह मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में हुए ट्रंप विरोधी आंदोलन का वीडियो है.
एक्स और फेसबुक जैसे माध्यमों पर इसके साथ यूजर्स ने लिखा, "वेनेजुएला चुप नहीं है, वह गुलाम नहीं बनेगा. पश्चिमी मीडिया प्रतिरोध को दिखा नहीं रहा इसका मतलब ये नहीं है कि उन्होंने वहशी ट्रंप के सामने हथियार डाल दिए हैं." (आर्काइव लिंक)
पड़ताल में क्या मिला:
बूम ने दोनों वीडियो की अलग-अलग जांच की और पाया कि ये ईरान और वेनेजुएला में हुए वास्तविक विरोध प्रदर्शन के वीडियो नहीं हैं बल्कि इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से क्रिएट किया गया है.
1. ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के दावे से वायरल वीडियो
संबंधित कीवर्ड सर्च की मदद से हमें बीबीसी फारसी की वेबसाइट पर एक वीडियो मिला, जिसके साथ बताया गया कि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को अंधेरे में रखने के लिए बिजली काट दी लेकिन लोगों ने फोन की लाइट जलाकर सड़कों को रौशन कर दिया. बीबीसी के मुताबिक इसके वीडियो 10 जनवरी को पोस्ट किए गए थे. यह तारीख वायरल वीडियो के कुछ कैप्शन में भी मेंशन है. हालांकि हमने पाया कि यह वीडियो वायरल वीडियो से मेल नहीं खाता.
Elnaz Mansour नाम के यूजर ने क्रिएट किया यह वीडियो
आगे रिवर्स इमेज और संबंधित कीवर्ड सर्च की मदद से हमें Elnaz Mansour नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 11 जनवरी 2026 का पोस्ट किया गया वायरल वीडियो मिला. इसके अंग्रेजी कैप्शन में Elnaz ने इसे डिजिटली क्रिएटेड वीडियो बताते हुए लिखा, "ईरान में चल रहे मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को एक डिजिटल श्रद्धांजलि. हाल ही में एक वीडियो सामने आया जिसमें तेहरान की अंधेरी सड़कों पर भारी भीड़ दिखाई दे रही है. सरकार द्वारा भीड़ की संख्या छिपाने के लिए सड़कों की लाइट बंद किए जाने के बाद भीड़ ने अपने मोबाइल फोन की लाइटें जला दीं."
उन्होंने आगे लिखा, "इस दृश्य ने मुझे AI का उपयोग कर कला के माध्यम से इसे रीक्रिएट करने के लिए प्रेरित किया. यह रचना वास्तविकता का विकल्प नहीं है! यह वास्तविकता का प्रतिबिंब है, एक ऐसा तरीका है जिससे अधिक से अधिक लोग यह देख सकें कि क्या हो रहा है खासकर तब जब पिछले चार दिनों से पूरा देश डिजिटल ब्लैकआउट में है."
एआई डिटेक्टर टूल्स ने भी की पुष्टि
हमने वीडियो को एआई डिटेक्टर टूल Hivemoderation, Undetectable.ai और DeepFake-O-Meter पर चेक किया. Hivemoderation ने 92 प्रतिशत और Undetectable.ai ने 97 प्रतिशत स्कोर के साथ इसमें एआई जनित या डीपफेक कंटेंट मौजूद होने की संभावना जताई.
वहीं DeepFake-O-Meter के Dual Label Deepfake Video Detection मॉडल ने भी इसे शत प्रतिशत फेक करार दिया.
2. वेनेजुएला में ट्रंप विरोधी प्रदर्शन के दावे से वायरल वीडियो
रिवर्स इमेज सर्च की मदद से हमें vezezueal0 नाम के टिकटॉक अकाउंट पर यह वीडियो मिला. इस वीडियो में स्पष्ट रूप से AI जनरेटेड का लेबल मौजूद था, जिसमें क्रिएटर द्वारा बताया जाता है कि अपलोड किया गया कंटेंट पूरी तरह से एआई जनरेटेड है या इसके बड़े हिस्से को एआई की मदद से एडिट किया गया है. (आर्काइव लिंक)
हमें vezezueal0 नाम के इस अकाउंट पर इस तरह के कई और एआई जेनरेटेड वीडियो भी मिले, जिनमें वायरल वीडियो की तरह ही विरोध प्रदर्शनों को दिखाया गया है. वायरल वीडियो और इन वीडियो के बीच में नजर आने वाले लोगों पर गौर करें तो साफ तौर पर देखा जा सकता है कि वे वास्तविक नहीं हैं.
एआई डिटेक्टर टूल्स ने क्या बताया
हमने इस वीडियो को भी Hivemoderation और DeepFake-O-Meter पर चेक किया. Hivemoderation ने 99.9 प्रतिशत स्कोर के साथ इसमें एआई जनित कंटेंट मौजूद होने की संभावना जताई.
वहीं DeepFake-O-Meter के ड्यूल लेबल डीपफेक वीडियो डिटेक्शन मॉडल और लिप-सिंक्ड डीपफेक डिटेक्शन मॉडल ने भी इसके फेक होने की संभावना शत प्रतिशत बताई.


