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फैक्ट चेक

उज्जैन में 80s ट्रेंड की वजह से 45 साल बाद चोर पकड़े जाने की मनगढ़ंत कहानी वायरल

बूम से बातचीत में एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि उज्जैन में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है. यह खबर पूरी तरह फर्जी है.

By -  Jagriti Trisha |

18 Sept 2026 4:34 PM IST

सोशल मीडिया पर AI से बनाई गई 80 के दशक की तस्वीरों के ट्रेंड के बीच एक पेपर क्लिप खूब वायरल हो रही है. इसमें दावा किया गया कि 1980 में सोने का हार चुराकर भागी एक महिला 45 साल बाद इस AI ट्रेंड की वजह से पकड़ी गई.

पेपर क्लिप में बताया गया कि यह घटना मध्य प्रदेश के उज्जैन की है, जहां AI से बनी फोटो अपलोड करने के बाद महिला की पहचान हुई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

हमने इस घटना की जांच की तो पाया कि यह पूरी कहानी मनगढ़ंत है और यह पेपर क्लिप OpenAI के AI टूल की मदद से बनाई गई है. उज्जैन पुलिस ने भी बूम से बातचीत में ऐसी किसी घटना से इनकार किया है.

गौरतलब है कि इन दिनों सोशल मीडिया एक ट्रेंड छाया हुआ है, जिसमें लोग ChatGPT के जरिए अपनी 80 के दशक की तस्वीरें बनाकर पोस्ट कर रहे हैं. इस ट्रेंड में कई अभिनेता, नेता और राजनीतिक पार्टियों ने भी हिस्सा लिया.

क्या है वायरल दावा?

इसी बीच यह पेपर क्लिप भी वायरल हुई, जिसमें चोरी की घटना की पूरी कहानी बताई गई है. इसमें महिला की वर्तमान और 45 साल पुरानी फोटो के साथ सुनार का कथित बयान भी मौजूद है.

इसे फेसबुक पर शेयर करते हुए एक यूजर ने लिखा, "1980 में सुनार की दुकान से सोने का हार चुराकर फरार हुई महिला… 45 साल बाद अपनी ही पुरानी फोटो सोशल मीडिया पर डालना भारी पड़ गया!"


आर्काइव लिंक.

हिंदुस्तान टाइम्स और पंजाब केसरी राजस्थान ने भी इस पेपर क्लिप को आधार बनाकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया कि 80 के दशक के इंस्टाग्राम ट्रेंड ने उज्जैन में 45 साल पुराने चोरी के मामले को सुलझाने में मदद की.

पड़ताल में क्या मिला: 

हमने उज्जैन में हुई ऐसी किसी घटना से संबंधित खबरों की तलाश की, लेकिन हमें कोई विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली. पेपर क्लिप को गौर से देखने पर हमें इसमें कई विसंगतियां नजर आईं. मसलन इस पर साल 2026 की बजाय 2025 की तारीख दी गई है. वहीं कई जगह महिला की वर्तमान फोटो बताते हुए साल 2023 लिखा गया है.

इसके अलावा घटना का विवरण भी अधूरा है. इसमें घटना के स्थान, पीड़ित सुनार या आरोपी के नाम जैसी जरूरी जानकारी मौजूद नहीं है.

पेपर क्लिप OpenAI की मदद से बनाई गई है

आगे पड़ताल में हमें उज्जैन में रहने वाली नेहा उपाध्याय के फेसबुक अकाउंट पर 13 सितंबर को पोस्ट की गई यह पेपर क्लिप मिली, जिसे AI टैग के साथ शेयर किया गया था. हालांकि अब इसे डिलीट कर दिया गया है. इस अकाउंट पर ऐसी कई और फर्जी पेपर कटिंग पोस्ट की गई हैं, जिनमें इसी तरह की अनोखी और हास्यास्पद खबरों के बारे में बताया गया है.



हमने पेपर क्लिप को OpenAI के इमेज वेरिफिकेशन टूल पर भी चेक किया और पाया कि इसमें OpenAI का SynthID वॉटरमार्क मौजूद है, जो बताता है कि इसे OpenAI के AI टूल्स की मदद से बनाया गया है.



हमने पाया कि पेपर क्लिप में मौजूद महिला की दोनों तस्वीरें, जिन्हें वर्तमान और 1980 का बताया गया है, OpenAI के AI टूल्स की मदद से ही बनाई गई हैं.




उज्जैन पुलिस ने किया खंडन

घटना की जानकारी के लिए हमने उज्जैन पुलिस से भी संपर्क किया. बूम से बातचीत में उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि उज्जैन में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है. वायरल खबर पूरी तरह फर्जी है. 



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