महिला की प्लेकार्ड लिए फ़ोटोशॉप्ड तस्वीर फिर हो रही है वायरल

यह तस्वीर 2012 में हुए भेदभाव विरोधी कैंपेन की है जिसे फ़ोटोशॉप कर अब सांप्रदायिक फ़र्ज़ी सूचना फ़ैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है |

एक महिला की तस्वीर जिसमें वो मुसलामानों के प्रति रूढ़िवादी धारणाओं के खिलाफ एक प्लेकार्ड लिए खड़ी है फ़ोटोशॉप कर शेयर की जा रही है | इस फ़र्ज़ी तस्वीर में लिखा है कि हिन्दू और मुस्लिम कभी शांतिपूर्ण तरीके से नहीं रह सकते |

यह तस्वीर वास्तव में मैरी वाशिंगटन विश्वविद्यालय यूनाइटेड स्टेट्स से है जिसपर साम्प्रदायिक शब्दों को जोड़ा गया है | इस तस्वीर को नीचे देखें |


बूम ने इस तस्वीर को ट्विटर पर भी पाया | एक यूज़र ने लिखा: "JAGO HINDU. झूठा सेक्यूलरिज्म, हिन्दू हिन्दू मुस्लिम झूठा भाईचारे के प्रपंच से बाहर निकलो। नही तो मरोगे हिन्दू। इस्लामी जिहाद।जेसे अफगानिस्तान,नापाकिस्तान,बंगलादेश,काश्मीर में मरे। इस्लाम हिन्दू/गेर मुस्लिम से कोई भाईचारा/सहानुभूति नहीं।"

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फ़ैक्ट चेक

इस तस्वीर पर जोड़ा गए शब्द साफ़ तौर पर जोड़े गए दिख रहे है | एक रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि यह 2012 की तस्वीर है |

यह एक भेदभाव विरोधी कैंपेन: वन अगेंस्ट स्टीरियोटाइप्स था | इसे वर्जिनिया स्थित मैरी वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में आयोजित किया गया था |

यह कैंपेन "द ब्यूटी ऑफ़ इस्लाम" पर डॉक्यूमेंट किया गया है | इस ब्लॉग पर लिखा है: "मार्च में मेरी यूनिवर्सिटी, मैरी वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के इस्लामिक स्टूडेंट एसोसिएशन ने विरोध और जजिंग के ख़िलाफ़ एक कैंपेन आयोजित किया था |"

वास्तविक तस्वीर नीचे देखि जा सकती है | वास्तविक प्लेकार्ड पर, "मैं एक मुसलमान हूँ पर अरब नहीं," लिखा है | इसमें नीचे "डोंट स्टीरियोटाइप मी - UMW ISA कैंपेन" लिखा है |


बूम ने पहले भी यही तस्वीर को खारिज किया था जब इससे फ़ोटोशॉप कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में दिखाया गया था |

Claim Review :   तस्वीर एक महिला को प्लेकार्ड पकड़े दिखाती है जिसमें लिखा है हिन्दू-मुस्लिम कभी शान्ति से नहीं रह सकते |
Claimed By :  Social media
Fact Check :  False
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