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फैक्ट चेक

पश्चिम बंगाल में मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ पर अमित मालवीय ने किया गलत सांप्रदायिक दावा

बूम ने पाया कि घटना में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं था. घटना में शामिल आरोपी और पीड़ित एक ही समुदाय से ताल्लुक रखते थे.

By -  Anmol Alphonso & Srijit Das
Published -  9 Jan 2026 1:52 PM IST
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    Amit Malviya’s false communal claim on West Bengal idol vandalism case

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने पश्चिम बंगाल में एक कुम्हार की दुकान पर तोड़ी गई हिंदू देवियों की मूर्तियों की तस्वीरों को साझा करते हुए झूठा दावा किया और इसे सांप्रदायिक हमला बता दिया.

    बूम ने जांच में पाया कि इस घटना में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं था. इसमें शामिल दोनों पक्ष एक ही समुदाय से ताल्लुक रखते थे.

    सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?

    अमित मालवीय ने एक्स पर पश्चिम बंगाल के नादिया में हुई तोड़-फोड़ की घटना की तस्वीरों को शेयर करते हुए अंग्रेजी कैप्शन में दावा किया कि यह तोड़फोड़ 'सनातन धर्म पर हमला' है जो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासन में बढ़ती 'हिंदू विरोधी नफरत' को दर्शाता है. (आर्काइव लिंक)

    एक्स पर एक अन्य वेरिफाइड यूजर ने भी तस्वीरों के साथ हिंदी कैप्शन में यही दावा किया और लिखा कि 'कारीगर जयंत दास द्वारा मेहनत से बनाई गई काली और सरस्वती की लगभग 50-60 मूर्तियों को मातलगढ़, शांतिपुर में उनकी वर्कशॉप के बाहर बेरहमी से तोड़ दिया गया. यह TMC-शासित बंगाल में हिंदू विरोधी नफरत की बढ़ती लहर का ताजा मामला है. ममता राज में कट्टरपंथी फल-फूल रहे हैं जबकि पुलिस उन्हें बचा रही है और हिंदू खून बहा रहे हैं.' (आर्काइव लिंक)

    फेसबुक पर भी इसकी एक तस्वीर को शेयर करते हुए यूजर्स इसी तरह का सांप्रदायिक दावा कर रहे हैं और ममता सरकार पर निशाना साध रहे हैं.



    पड़ताल में क्या मिला:

    घटना पश्चिम बंगाल के नादिया जिले की है

    ईटीवी भारत बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के नादिया जिले स्थित शांतिपुर में एक मिट्टी के बर्तन बनाने की वर्कशॉप में हिंदू देवी-देवताओं काली और सरस्वती की कई मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ की गई और क्षतिग्रस्त कर दिया गया.

    आजतक बांग्ला ने दुकान के मालिक जयंत दास और उनके बेटे पलाश से बात की. उन्होंने आरोप लगाया कि दो भाइयों, अमित डे और असित डे ने झगड़े के बाद उनकी मूर्तियों को तोड़ दिया. उन्होंने यह भी बताया कि सीसीटीवी फुटेज से भी इसकी पुष्टि होती है.


    पश्चिम बंगाल पुलिस ने किया सांप्रदायिक आरोपों का खंडन

    बूम ने जानकारी के लिए नादिया के शांतिपुर पुलिस स्टेशन से संपर्क किया जिसने घटना में सांप्रदायिक एंगल से इनकार किया और बताया कि फरार आरोपियों की पहचान अमित डे और असित डे के रूप में हुई है.

    राणाघाट जिला पुलिस ने भी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ललतू हलदर का एक बयान जारी कर इस झूठे सांप्रदायिक दावे का खंडन किया और इसका कारण निजी विवाद बताया.

    इसके अलावा बूम ने पीड़ित और मिट्टी के बर्तन बनाने वाले फैक्ट्री के मालिक जयंत से भी संपर्क किया. उन्होंने भी बातचीत में आरोपियों की पहचान की पुष्टि करते हुए सांप्रदायिक दावे का खंडन किया.


    यह भी पढ़ें -यूपी में बुर्का पहने पकड़े गए रेप के आरोपी का मुस्लिम होने का सांप्रदायिक दावा गलत है


    Tags

    Amit MalviyaBJPWest BengalTMCMamata BannerjeeCommunal claim
    Read Full Article
    Claim :   तस्वीरों में पश्चिम बंगाल के नादिया स्थित शांतिपुर में हुए सांप्रदायिक हमले में काली और सरस्वती की 50-60 क्षतिग्रस्त मूर्तियों को देखा जा सकता है.
    Claimed By :  Social Media Posts
    Fact Check :  False
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