पाकिस्तानी पत्रकार ने किसान परेड से जोड़कर 7 साल पुरानी तस्वीर शेयर की

ट्विटर पर तस्वीर शेयर करते हुए पाकिस्तान के ट्विटर यूज़र्स द्वारा दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर भारत की नींव हिला देगी.

क़रीब सात साल पुरानी एक तस्वीर जिसमें एक सिख व्यक्ति ज़मीन पर गिरा पड़ा है और पुलिसकर्मी उसकी पिटाई करते हुए दिखते हैं, को पाकिस्तानी ट्विटर यूज़र (Pakistani Twitter Users) खूब शेयर कर रहे हैं. यूज़र्स इस तस्वीर को 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर परेड (Tractor Parade) के दौरान हुई हिंसा से जोड़कर वायरल कर रहे हैं.

ट्विटर पर कई हैशटैग जैसे- इंडियन रिपब्लिक ब्लैक डे, ट्रैक्टर मार्च दिल्ली, किसान आंदोलन के साथ तस्वीर शेयर करते हुए पाकिस्तान के ट्विटर यूज़र्स द्वारा दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर भारत की नींव हिला देगी.

बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर मई 2013 में दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए एक प्रदर्शन की है, जब 1984 सिख दंगों के आरोपियों को सज़ा दिलाने की मांग को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास निकट प्रदर्शन किया गया था.

किसान रैली: पत्रकारों पर हमले की एक जैसी कहानी कहते ट्विटर हैंडल का सच

वायरल तस्वीर में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति ज़मीन पर गिरा पड़ा है और उसकी पगड़ी छिटक कर अलग पड़ी है. हाथों में डंडा लिए कई पुलिस कर्मी उसकी पिटाई करने की मुद्रा में दिख रहे हैं, जबकि अन्य पुलिसकर्मी थोड़ा अलग खड़े उन्हें देख रहे हैं. तस्वीर को बीते 26 जनवरी को किसान रैली के दौरान सुरक्षाकर्मियों और किसानों के बीच हुई हिंसक झड़प की पृष्ठभूमि में शेयर किया जा रहा है.

पाकिस्तानी न्यूज़ आउटलेट 'उर्दू न्यूज़' के पत्रकार बशीर चौधरी ने ट्विटर पर तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया कि "यह तस्वीर भारत की नींव हिला देगी. #JaagPunjabiJaag #IndianRepublicBlackDay #TractorMarchDelhi #KisanTractorRally #FarmersProtest"

ट्वीट का आर्काइव वर्ज़न यहां देखें

एक अन्य पाकिस्तानी ट्विटर यूज़र ने वायरल तस्वीर के साथ एक और दूसरी तस्वीर शेयर किया और लिखा, "भारत में सिखों के साथ व्यवहार और पाकिस्तान में सिखों के साथ व्यवहार. मुझे लगता है जिन्ना सही थे.#delhi #रेडफ़ोर्ट #JinnahWasRight #FarmersProstests"

आर्काइव वर्ज़न यहां देखें. अन्य ट्वीट यहां, यहां और यहां देखें.

नहीं, यह तस्वीर किसान रैली से संबंधित नहीं है, वायरल दावा भ्रामक है

फ़ैक्ट चेक

बूम ने वायरल तस्वीर को रिवर्स इमेज पर सर्च किया तो पाया कि यह तस्वीर मई 2013 में दिल्ली में 1984 के सिख दंगों के आरोपी सज्जन सिंह को बरी किये जाने के फ़ैसले के बाद सिखों के एक प्रदर्शन की है.

सर्च के दौरान हमें यह तस्वीर मनवीर सिंह ब्लॉग्स्पॉट पर मिली, जिसमें बताया गया कि दिल्ली में सैकड़ों सिखों ने 1984 के सिख विरोधी दंगे केस में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी करने और सिखों के कथित सामूहिक हत्यारे को मृत्युदंड देने की मांग को लेकर संसद भवन के पास लगभग एक घंटे तक यातायात बाधित किया. लेख में वायरल तस्वीर के अलावा प्रदर्शन की अन्य तस्वीर भी प्रकशित की गई हैं.


चूंकि तस्वीर के नीचे बायीं ओर तस्वीर का क्रेडिट शेखर यादव को दिया गया है, तो हमने शेखर यादव से संपर्क किया जो फ़िलहाल न्यू इंडियन एक्सप्रेस में कार्यरत हैं.

शेखर यादव ने पुष्टि की कि यह तस्वीर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन की है. हालांकि, वो एकदम सटीक जानकारी देने में असमर्थ थे कि कब यह तस्वीर क्लिक की थी. उन्होंने अनुमानित तौर पर बताया कि "यह साल 2010-11 के आसपास की है. डेली मेल ने इस तस्वीर को अपने फ्रंट पेज पर छापा था. आप गूगल पर सर्च करेंगे तो आपको सटीक जानकारी मिल जाएगी."

हमने कुछ कीवर्ड की मदद से गूगल पर खोज की तो डेली मेल पर 5 मई 2013 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में यही तस्वीर मिली. तस्वीर का क्रेडिट शेखर यादव को दिया गया है.


रिपोर्ट में कहा गया कि सिखों के एक समूह ने रविवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी करने के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 7 रेस कोर्स स्थित आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया. लेकिन संसद मार्ग थाने के पास ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया. अन्य मीडिया आउटलेट्स ने भी घटना से जुड़ी रिपोर्ट और ग्राउंड रिपोर्ट कवर किया.

ग़लत संदर्भ में वायरल हो रही तस्वीर के जवाब में शेखर यादव ने पाकिस्तानी पत्रकार के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, "मेरी यह तस्वीर 1984 के सिख दंगों से लेकर 10 साल पहले के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की है। कृपया इसे प्रचार के रूप में उपयोग करना बंद करें। दुकान के नाम पे कुछ भी?"

'दिल्ली पुलिस लट्ठ बजाओ' का नारा लगाते लोगों की यह वीडियो पुरानी है

Claim :   किसान रैली की यह तस्वीर भारत की नींव हिला देगी
Claimed By :  Pakistani Twitter Users
Fact Check :  False
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