मणिकर्णिका पुनर्निर्माण के दौरान तोड़ी गई मूर्तियों के दावे से पुरानी तस्वीरें वायरल
बूम ने पाया कि मणिकर्णिका घाट के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत तोड़ी गई मूर्तियों के दावे से वायरल कोलाज की ज्यादातर तस्वीरें पुरानी हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्यक्रम की खूब आलोचना हो रही है. असल में इस विकास परियोजना के तहत घाट परिसर में जेसीबी मशीनें चलाए जाने के वीडियो सामने आए जिसके बाद स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि पुरानी संरचनाओं को हटाने की प्रक्रिया में वहां मौजूद प्राचीन मूर्तियों के साथ भी तोड़-फोड़ की गई है.
इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरों का एक कोलाज वायरल होने लगा, जिनमें क्षतिग्रस्त मूर्तियों और ढांचों को देखा जा सकता है.
बूम ने इस कोलाज की जांच की तो पाया कि इसमें मौजूद ज्यादातर तस्वीरें पुरानी हैं. इनका हाल में मणिकर्णिका घाट पर हुए ध्वस्तीकरण से कोई संबंध नहीं है.
गौरतलब है कि मणिकर्णिका तीर्थ क्षेत्र विकास परियोजना की नींव 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी. इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री योगी का कहना है कि किसी भी मूर्ति के साथ तोड़-फोड़ नहीं की गई है और एआई-जनरेटेड वीडियो के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है.
वाराणसी के मेयर और क्षेत्रीय भाजपा विधायक ने भी मणिकर्णिका घाट का दौरा किया और कहा कि किसी मंदिर को ध्वस्त नहीं किया गया है. मूर्तियों को सुरक्षित रखा गया है, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन्हें पुनर्स्थापित किया जाएगा.
सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?
इस वायरल कोलाज में कुल पांच तस्वीरें मौजूद हैं, जिनमें क्षतिग्रस्त ढांचों के मलबे दिखाई दे रहे हैं. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने अपने फेसबुक और एक्स अकाउंट पर इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, 'ये महमूद गजनवी का नही नरेंद्र मोदी का राज है. जहां हमारे 'पौराणिक मंदिरों' को तोड़ा जा रहा है. देखिए काशी के मणिकर्णिका घाट पर विनाश का ये दृश्य....' (आर्काइव लिंक)
सांसद पप्पू यादव ने भी तस्वीरों को इसी दावे से शेयर करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा और लिखा, 'बनारस के मणिकर्णिका घाट पर यह विध्वंस महमूद गजनवी के असली अनुयायी मोदी ने किया. बनारस का इतिहास गौरव वहां के प्राचीन मंदिरों पर बुलडोजर बाबर नहीं मोदी चला रहे हैं...' (आर्काइव लिंक)
बता दें कि मणिकर्णिका घाट मामले से जोड़कर सोशल मीडिया पर एआई जनरेटेड वीडियो और पुरानी तस्वीरें साझा कर धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में आप नेता संजय सिंह और पप्पू यादव सहित आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
पड़ताल में क्या मिला:
वायरल कोलाज की तीन तस्वीरें पुरानी हैं
हमने रिवर्स इमेज सर्च की मदद से सभी तस्वीरों की जांच की तो पाया कि इनमें से तीन तस्वीरें पुरानी हैं. इनका मणिकर्णिका पुनर्विकास के हालिया प्रकरण से कोई संबंध नहीं है. नीचे हमने पुरानी और असंबंधित तस्वीरों का क्रमवार फैक्ट चेक किया है.
एक: मंदिर परिसर में गिरे विशालकाय पेड़ की तस्वीर
कोलाज में मौजूद दूसरी तस्वीर हमें लाइव हिंदुस्तान की 29 अप्रैल 2021 की एक रिपोर्ट में मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, 28 अप्रैल 2021 को काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित हनुमान मंदिर के पास का प्राचीन अक्षयवट का वृक्ष जड़ से उखड़ कर गिर गया था. घटना विश्वनाथ कॉरिडोर सौन्दर्यीकरण के दौरान की है. तब महंत परिवार ने आरोप लगाया था कि यह वृक्ष मंदिर प्रशासन की लापरवाही के कारण गिरा.
न्यूज 18 और ईटीवी भारत ने भी 2021 में इस घटना से संबंधित खबरें प्रकाशित की थीं. इन रिपोर्ट में भी वायरल हो रही तस्वीर मौजूद है.
दो: मलबे के बीच नंदी की मूर्ति वाली तस्वीर
कोलाज की तीसरी तस्वीर हमें शिवम मिश्रा नाम के एक्स यूजर के अकाउंट पर मिली. शिवम ने यह तस्वीर 24 अक्टूबर 2021 को पोस्ट की थी, जिससे स्पष्ट होता है कि यह तस्वीर हाल की नहीं है. पोस्ट के मुताबिक यह मंदिर काशी विश्वनाथ परिसर में स्थित है जिसे कुछ ही दिनों में गिराया जा सकता है.
शिवम मिश्रा ने इसी जगह की कुछ अन्य तस्वीरें भी पोस्ट की थीं जो थोड़े अलग एंगल से ली गई थीं. इन तस्वीरों में भी आस-पास की स्थिति वायरल तस्वीर जैसी ही नजर आती है.
अमर उजाला और लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के साथ-साथ न्यूज 18 की ग्राउंड रिपोर्ट में भी पुलिस के हवाले से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर स्थित इस 'कुंभ महादेव' मंदिर के स्थलीय निरिक्षण के बाद की तस्वीर दी गई है तथा पुरानी तस्वीर को फर्जी बतया गया है. हालांकि न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में वायरल पुरानी तस्वीर को एआई जनरेटेड बता दिया है.
तीन: मलबे के बीच क्षतिग्रस्त शिवलिंग की तस्वीर
वायरल कोलाज में नजर आ रही आखिरी तस्वीर हमें अमर उजाला की साल 2018 की एक रिपोर्ट में मिली. रिपोर्ट के अनुसार 19 दिसंबर 2018 को वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र के रोहित नगर विस्तार इलाके में एक प्लॉट पर पड़े मलबे से सवा सौ से अधिक खंडित शिवलिंग बरामद किए गए थे. यह तस्वीर साल 2022 में भी वायरल हुई थी, तब इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से जोड़कर साझा किया जा रहा था. उस समय भी बूम ने इस तस्वीर का फैक्ट चेक किया था.
प्रशासन ने मलबे से मिले 126 शिवलिंगों को एकत्र कर थाने में रखवा दिया था. आशंका जताई जा रही थी कि यह मलबा मंदिर कॉरिडोर के लिए चल रहे ध्वस्तीकरण से निकला है, जिसे किसी ठेकेदार ने यहां फेंक दिया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से स्पष्ट किया गया कि ये क्षतिग्रस्त शिवलिंग दो किलोमीटर दूर गणेश महल इलाके में स्थित एक जर्जर मंदिर के थे, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के किसी मंदिर के नहीं.


