पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के लिए हुक्का बनाते मुलायम सिंह की तस्वीर फेक है
बूम ने पाया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत सपा नेता मुलायम सिंह यादव की यह तस्वीर OpenAI के AI टूल्स की मदद से बनाई गई है.

सपा नेता अखिलेश यादव और RLD प्रमुख जयंत चौधरी की आपसी बयानबाजी के बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को जमीन पर बैठकर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के लिए हुक्का तैयार करते हुए दिखाया गया है.
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर फेक है. मूल तस्वीर में चौधरी चरण सिंह, मुलायम सिंह यादव के साथ नहीं बल्कि किसानों के साथ बैठे नजर आ रहे हैं. OpenAI के इमेज वेरिफिकेशन टूल ने संकेत दिया कि इस तस्वीर को OpenAI के AI टूल्स की मदद से बनाया गया है.
अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसी बीच सपा नेता अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम में बिना नाम लिए कहा कि 'हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए'. उनके इस बयान को राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी पर तंज के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि साल 2024 में उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन को छोड़कर एनडीए में शामिल हो गई थी. RLD ने भी अखिलेश के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए इसकी आलोचना की है.
चूंकि जयंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते हैं, इसलिए इस तस्वीर को वास्तविक मानकर अखिलेश यादव के बयान से जोड़ते हुए शेयर किया जा रहा है. इसके साथ कहा जा रहा है कि जो मुलायम सिंह कभी चौधरी चरण सिंह का हुक्का भरा करते थे आज अखिलेश यादव उनके पोते को ही चवन्नी छाप बोल रहे हैं.
सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?
एक्स पर एक यूजर ने ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर को शेयर करते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा और लिखा, 'जिनके बाप चौधरी साहेब के यहां हुक्का भरते थे, उनकी औलादें चौधरी साहेब के वारिस को चवन्नी बोल रही हैं.'
कई अन्य यूजर्स ने इसी तस्वीर के कलर्ड वर्जन को भी शेयर करते हुए इसी तरह का दावा किया है.
पड़ताल में क्या मिला:
1. चौधरी चरण सिंह की मूल तस्वीर
रिवर्स इमेज सर्च की मदद से हमें Charan Singh नाम की वेबसाइट पर पूर्व पीएम चरण सिंह की मूल तस्वीर मिली. हमने पाया कि इस तस्वीर में उनके साथ मुलायम सिंह यादव नहीं बल्कि दो अन्य लोग मौजूद हैं.
वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह तस्वीर सन 1976 की है जिसमें चरण सिंह किसानों के साथ बैठकर बातचीत कर रहे हैं.
2. तस्वीर में एआई की मदद से की गई हेरफेर
इस तस्वीर से हमें अंदेशा हुआ कि वायरल तस्वीर फेक है और इसमें एआई की मदद से छेड़छाड़ की गई है. इसकी जानकारी के लिए हमने इसके कलर्ड वर्जन को AI डिटेक्शन टूल Hive Moderation पर चेक किया. Hive Moderation ने तस्वीर के AI जनरेटेड होने की संभावना 99.9 प्रतिशत जताई.
पुष्टि के लिए हमने इसके ब्लैक एंड व्हाइट वर्जन को OpenAI के इमेज वेरिफिकेशन टूल पर भी चेक किया. जांच में पता चला कि इसमें OpenAI का SynthID वॉटरमार्क मौजूद है, जो संकेत देता है कि तस्वीर को OpenAI के AI टूल्स की मदद से बनाया या एडिट किया गया है.


