अरुणाचल में चीनी सैनिकों को खदेड़ने के दावे से वायरल वीडियो नेपाल के एक मेले का है
बूम ने पाया कि सोशल मीडिया पर पुराने और अलग-अलग घटनाओं के वीडियो भारत-चीन विवाद से जोड़कर शेयर किए जा रहे हैं.

अरुणाचल प्रदेश के बॉर्डर एरिया में चीन और भारतीय सेना के बीच जारी टकराव से जोड़कर सोशल मीडिया पर लगातार पुराने और असंबंधित वीडियो वायरल हो रहे हैं.
दावा: एक
भारी संख्या में सीढ़ीनुमा खेत में भागते लोगों के एक वीडियो के साथ कहा गया कि अरुणाचल में घुसपैठ कर रहे चीनी आर्मी को वहां के स्थानीय लोगों ने खदेड़ दिया.
फैक्ट: वीडियो नेपाल में एक धार्मिक आयोजन का है
जांच में हमें नेपाली यूजर सुनील कुंवर के इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट पर यह वीडियो मिला. पोस्ट में वीडियो को 'Woyl' का बताया गया था. वायल (Wayal) नेपाल के डोटी जिले में स्थित एक गांव है.
आगे हमें अन्य नेपाली यूजर्स के अकाउंट पर भी इस आयोजन के कई वीडियो मिले, जिनमें वायरल वीडियो जैसे दृश्य शामिल थे. यहां, यहां, यहां और यहां देखें.
नीचे की गई तुलना में वायरल वीडियो वाला वही नीला घर देखा जा सकता है.
पोस्ट के मुताबिक ये वीडियो वायल में आयोजित दशैं पूर्णिमा मेले के हैं. नेपाल में यह त्योहार आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर में मनाया जाता है और करीब दो हफ्तों तक चलता है. इस दौरान स्थानीय परंपराओं के तहत जानवरों की बलि भी दी जाती है.
डोटी के एक फेसबुक यूजर ने भी वायरल दावे का खंडन करते हुए इसे दशैं मेले का वीडियो बताया.
दावा: दो
इस वायरल वीडियो के साथ भी कहा गया कि इसमें अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थानीय लोगों को देश की सुरक्षा करते हुए देखा जा सकता है.
फैक्ट: वीडियो जम्मू-कश्मीर का है
पड़ताल के दौरान हमें यूट्यूब पर 5 जुलाई 2026 को अपलोड किया गया यह वीडियो मिला. इसके साथ बताया गया कि अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन वाली जगह पर श्रद्धालुओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई.
हमें सुशील सैनी नाम के इंस्टाग्राम हैंडल पर भी 5 जुलाई को पोस्ट किए गए इससे मिलते-जुलते कई वीडियो मिले.
वीडियो के साथ दी गई जानकारी के मुताबिक यह अमरनाथ यात्रा के लिए बालटाल में तत्काल रजिस्ट्रेशन और RFID कार्ड बनवाने के लिए जुटी भीड़ का है. इनमें सुरक्षाबल भीड़ को नियंत्रित करते नजर आ रहे हैं. इन वीडियो में बैरिकेड पर 'जम्मू-कश्मीर पुलिस' लिखा हुआ देखा जा सकता है.
इंडियन आर्मी की फैक्ट चेक इकाई ने भी इसका खंडन करते हुए इसे जम्मू-कश्मीर के बालटाल में तत्काल रजिस्ट्रेशन और RFID कार्ड लेने के लिए जमा तीर्थयात्रियों की भीड़ का बताया.
दावा: तीन
एक वीडियो के साथ मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया गया कि भाजपा सरकार सेना को दिल्ली बुला रही है, जबकि चीन अरुणाचल में कब्जा कर रहा है. इस वीडियो में ग्रामीणों और सुरक्षाबलों के बीच कहासुनी देखी जा सकती है.
फैक्ट: वीडियो सियांग एंटी-डैम प्रोटेस्ट का है
फेसबुक पर Sagalee News ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए बताया कि यह 29 सितंबर की घटना है. तब NHPC (National Hydroelectric Power Corporation) की प्रस्तावित सियांग बांध परियोजना के खिलाफ बेगिंग गांव में करीब 400 लोग विरोध में उतर आए थे.
घटना से जुड़ी मेघालय टाइम्स, नेशनल हेराल्ड और प्रभात खबर की रिपोर्ट में भी वीडियो का स्क्रीनशॉट देखा जा सकता है. अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट का जमकर विरोध हुआ था, इस दौरान हिंसा की भी खबरें आई थीं.
दावा: चार
एक अन्य वीडियो में दावा किया गया कि पैंगोंग झील पर भारत-चीन विवाद के दौरान PLA ने एक और भारतीय सैनिक को पकड़ लिया और यह रिहा किए गए भारतीय जवान का असली फुटेज है.
फैक्ट: वीडियो साल 2025 का है
हमें घटना से जुड़ी 2025 की न्यूज 18 की एक रिपोर्ट मिलीं, जिसमें एक मिनट 36 सेकंड के इस वीडियो का जिक्र किया गया था. रिपोर्ट में बताया गया नियंत्रण रेखा (LAC) पर ऊंचाई के कारण सांस लेने में तकलीफ होने के बाद एक भारतीय जवान बेहोश हो गया, जिसके बाद चीनी सैनिकों ने उसे मेडिकल सहायता दी थी.
साल 2025 में PLA Military Updates के एक्स हैंडल ने भी वीडियो शेयर करते हुए दावा किया था कि चीनी सेना ने एक भारतीय सैनिक को मेडिकल सहायता दी. तब कई लोगों ने इसे चीनी प्रोपगैंडा करार दिया था.
हालांकि हम इस घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सके, लेकिन जांच में साफ है कि वीडियो पुराना है और साल 2025 से इंटरनेट पर मौजूद है.


