कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में उमड़ी भीड़ के दावे से AI एडिटेड विजुअल हुए वायरल
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो और तस्वीर प्रदर्शन के वास्तविक दृश्य नहीं दिखाते, बल्कि इनमें एआई की मदद से छेड़छाड़ की गई है.

सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शन में जुटी भीड़ के दावे से कुछ विजुअल्स वायरल हो रहे हैं. बूम ने जांच की तो पाया कि यह विजुअल्स वास्तविक नहीं हैं. इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मैन्यूपुलेट किया गया है.
कॉकरोच जनता पार्टी ने NEET पेपर लीक सहित विभिन्न परीक्षाओं में धांधली और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब पांच घंटे तक प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में सोनम वांगचुक समेत हजारों छात्र-युवाओं ने भी हिस्सा लिया. पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन किया जाएगा.
सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?
वायरल हो रहा वीडियो एक ड्रोन शॉट है, जिसमें जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ को दिखाने का दावा किया गया है.
एक्स पर न्यूज आउटलेट दैनिक भास्कर समेत कई यूजर्स ने भी इस वीडियो को वास्तविक मानकर शेयर करते हुए इसे CJP प्रदर्शन का बताया. हालांकि बाद में दैनिक भास्कर ने इसे डिलीट कर दिया.
वहीं एक तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने प्रदर्शन में जुटी भीड़ को दिखाने के लिए एआई जनित तस्वीर का इस्तेमाल किया.
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके की इस तस्वीर में पीछे दो ही व्यक्ति कई जगहों पर खड़े नजर आते हैं, जिसे एआई जनित विसंगति के रूप में चिन्हित किया जा रहा है.
पड़ताल में क्या मिला:
1. वीडियो के साथ लगा है AI info का टैग
बूम को वीडियो और तस्वीर में कुछ विसंगतियां दिखाई दीं, जिनसे संकेत मिलता है कि इनमें भीड़ को दिखाने के लिए एआई का इस्तेमाल किया गया है.
पड़ताल के दौरान हमें Mohsin Sultan नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6 जून का पोस्ट किया गया यह वीडियो मिला. इसके साथ AI info का टैग लगा था, जो बताता है कि वीडियो को AI की मदद से एडिट या क्रिएट किया गया है.
Mohsin के इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस तरह के और भी एआई जनित वीडियो देखे जा सकते हैं.
वीडियो में मौजूद असंगतियां
हमने यह भी पाया कि वीडियो में जंतर-मंतर की संरचना थोड़ी विकृत दिखाई दे रही है और साइनबोर्ड या पोस्टर पर लिखे टेक्स्ट अस्पष्ट हैं.
2. मूल तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है
रिवर्स इमेज सर्च की मदद से हमें द हिंदू के आधिकारिक एक्स हैंडल पर मूल तस्वीर मिली. हमने पाया कि मूल तस्वीर में पीछे खड़े दोनों शख्स सिर्फ एक ही जगह पर नजर आ रहे हैं. इससे साफ था कि गलत दावा करने के इरादे से तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है.
नीचे मूल तस्वीर और वायरल तस्वीर के बीच तुलना देखी जा सकती है, जिसमें स्पष्ट दिखता है कि एक स्थान पर मौजूद दो व्यक्तियों की छवि को एडिट कर तीन अलग-अलग जगहों पर कॉपी-पेस्ट किया गया है.
बूम ने तस्वीर की जांच के लिए Deepfakes analysis unit (DAU) के अपने सहयोगियों की भी मदद ली. उनकी पड़ताल में कुछ एआई डिटेक्शन टूल्स ने तस्वीर में AI की मदद से हेरफेर की संभावना बताई.


