बांग्लादेश में पिता के सामने हिंदू महिला के रेप के गलत दावे से वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि यह मामला रेप से जुड़ा नहीं था. घटना अप्रैल 2026 की बांग्लादेश के कोमिल्ला की है, जहां एक एनजीओ के कर्मचारियों ने पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद में एक हिंदू दंपति के साथ मारपीट की थी.

सोशल मीडिया पर बांग्लादेश का एक वीडियो भ्रामक तरीके से वायरल है. वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश में मुस्लिमों ने एक हिंदू लड़की के पिता के सामने उसका बलात्कार किया. आगे कहा जा रहा है कि वीडियो में रोते हुए दिखाई दे रहे व्यक्ति पीड़िता के पिता हैं, जोकि घटना के बारे में बता रहे हैं.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो अप्रैल 2026 का बांग्लादेश के कोमिल्ला (Comilla) का है, जहां एक एनजीओ के कर्मचारियों ने पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद के बाद कथित तौर पर एक हिंदू दंपति के साथ मारपीट की थी. वीडियो में दिख रहा शख्स महिला का पति है और यह मामला रेप से जुड़ा नहीं था.
सोशल मीडिया पर क्या वायरल?
वायरल हो रहे लगभग 28 सेकंड के इस वीडियो में एक महिला रोते हुए अपनी हालत बयां करती नजर आ रही है. वहीं वीडियो के बाद के हिस्से में एक व्यक्ति भी रोते हुए घटना के बारे में बताते दिखाई दे रहा है.
एक्स पर इस्कॉन कोलकाता के प्रवक्ता राधारमण दास ने वीडियो को शेयर करते हुए इसके अंग्रेजी कैप्शन में लिखा, "एक बांग्लादेशी हिंदू लड़की जिसका उसके पिता के सामने मुसलमानों ने रेप किया, वह दूसरों को यह घटना बता रही है जबकि उसका पिता रो रहा है.."
फेसबुक पर भी कई यूजर्स ने इस वीडियो को हिंदी कैप्शन के साथ शेयर करते हुए इसी तरह का दावा किया है. आर्काइव लिंक यहां और यहां देखें.
गौरतलब है कि बूम पहले भी इस्कॉन प्रवक्ता राधारमण दास द्वारा शेयर की गई फर्जी खबरों का फैक्ट चेक कर चुका है.
पड़ताल में क्या मिला:
घटना बांग्लादेश में कोमिल्ला की है
रिवर्स इमेज और संबंधित कीवर्ड सर्च की मदद से हमें इस घटना से जुड़ी कई स्थानीय मीडिया रिपोर्ट मिलीं, जिनके मुताबिक मामला पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद से जुड़ा था.
कोमिल्ला प्रतिदिन, त्रिकालकंठो और दैनिक बांग्ला न्यूज की रिपोर्ट में बताया गया कि घटना 30 अप्रैल 2026 की है. बांग्लादेश के कोमिल्ला में एक एनजीओ के फील्ड वर्कर मिराज हुसैन और उसके साथियों का हिंदू दंपति रीना रानी साहा और श्यामल चंद्र सरकार के साथ किस्तों के भुगतान में देरी को लेकर विवाद हो गया था. विवाद बढ़ने पर दंपति के साथ मारपीट कर दी गई.
मामला पैसों के लेन-देन से जुड़ा था
असल में रीना रानी साहा ने एनजीओ पल्ली मंगल से 80,000 टका (बांग्लादेशी मुद्रा) कर्ज लिया था और वह हर महीने इसकी किस्तें चुका रही थीं. लगातार कुछ महीनों तक किस्त जमा नहीं कर पाने के कारण एनजीओ के कर्मचारी उनके घर पहुंच गए. कथित तौर पर इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस हुई जो बाद में मारपीट में बदल गई.
आरोप है कि मारपीट के दौरान पीड़िता के कपड़े भी फाड़ दिए गए थे. इस मामले में पीड़ित श्यामल चंद्र ने कोमिल्ला कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन में केयरटेकर समेत चार लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. हालांकि एनजीओ ने मारपीट के आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि दंपति ने कर्ज चुकाने से बचने के लिए यह पूरा नाटक रचा था.
स्थानीय रिपोर्ट में मौजूद है पीड़िता का बयान
कई स्थानीय न्यूज आउटलेट ने सोशल मीडिया पर इस घटना का मूल वीडियो भी साझा किया था, जिसमें पीड़ित दंपति पूरे घटनाक्रम के बारे में बताते नजर आ रहे हैं. यहां और यहां देखें.
कुछ रिपोर्ट में पीड़िता का बयान भी देखा जा सकता है, जिनमें वह बंगाली भाषा में अपने साथ हुई मारपीट का विवरण देती और न्याय की मांग करती नजर आती हैं. यहां और यहां देखें.
बूम बांग्लादेश के साथी तौसिफ अकबर से मिले इनपुट के साथ



