स्टेज पर गाना गाते हुए पाकिस्तानी बच्चे का वीडियो काल्पनिक दावों के साथ फ़िर हुआ वायरल

सालों से वायरल इस पोस्ट में दावा किया गया है की वीडियो में दिख रहा बच्चा एक शहीद फ़ौजी का बेटा है व अपने पिता की याद में यह गाना गा रहा है | वीडियो में दिख रहा बच्चा दरअसल एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया स्टार है जिसके पिता भी गायक हैं
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फ़ेसबुक पर एक वीडियो काल्पनिक दावों के साथ वायरल हो रहा है | वीडियो में एक बच्चा "बाबा मेरे प्यारे बाबा" गाना गाते नज़र आ रहा है | इस वीडियो के साथ अंग्रेजी में कैप्शन में लिखा है जिसका हिंदी अनुवाद है 'यह एक आर्मी जवान का लड़का है | इसके पिता आतंकवादियों के ख़िलाफ़ एक ऑपरेशन में मारे गए | अब यह बच्चा एक बोर्डिंग आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ रहा है | इसका आत्मविश्वास देखिये | यह एक विशेष सूंदर वीडियो है जरूर देखें |' आपको बता दें की यह एक काल्पनिक कहानी है और दावा फ़र्ज़ी है |

आप इस फ़ेसबुक पोस्ट को यहाँ और इसके आर्काइव्ड वर्शन को यहाँ देख सकते हैं |

वीडियो का स्क्रीनग्रैब
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लाखों बार देखा जा चूका है यह वीडियो

यही वीडियो पहले भी इसी दावे के साथ वायरल हो चूका है |

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2018 में वायरल हुआ वही वीडियो

जब बूम ने इसे फ़ेसबुक पर खोजा तो समान वीडियो कई यूज़र्स द्वारा शेयर किया गया है | यह वीडियो पिछले चार सालों में लाखों बार देखा जा चूका है और कई हज़ार बार इसी या इस तरह के दावों के साथ शेयर किया गया है | करीब दो साल पहले बूम ने इस वीडियो के सच पर एक लेख लिखा था | आप इस लेख को नीचे देख सकते हैं |

No, This Is Not An Army Officer’s Son; This Is Pakistan’s Ghulam-e-Murtaza

यह वीडियो 2018 में ट्विटर पर भी समान दावों के साथ वायरल हुआ था | आप 2018 में वायरल पोस्ट्स यहाँ और यहाँ देख सकते हैं | ट्विटर पर किये दावों में यहाँ तक लिखा था की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में उपस्थित थे |

ट्विटर का स्क्रीनशॉट

फ़ैक्ट चेक

बूम ने वीडियो का स्क्रीनग्रैब लेकर रिवर्स इमेज सर्च किया तो पाया की यह बच्चा पाकिस्तान का सोशल मीडिया स्टार गुलाम-ए-मुर्तज़ा है | इसके पिता नदीम अब्बास हैं जो ख़ुद पेशे से एक गायक है ना की आर्मी जवान | मज़ेदार बात ये है की शेयर किये जा रहे वीडियो के अंत में नदीम और ग़ुलाम साथ मिलकर गाने की कुछ कड़ियाँ गाते हैं |

गाने की कुछ आखिरी कड़ियाँ दोनों साथ में गा रहे हैं

पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल पर आतंकी हमला होने के बाद लाहौर में एक कार्यक्रम में मृतकों और शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए मुर्तज़ा ने यह गाना गया था | बूम ने 2017 में ही इस बात की पुष्टि कर यह पता लगाया था की बच्चे की उम्र 4 साल थी जब यह गाना रिकॉर्ड किया गया था | बूम को समां टी वी नामक एक वेबसाइट पर इस आयोजन के ऊपर लेख मिला जिसमें इस बच्चे की उम्र की पुष्टि होती है |

तीन साल पहले जब यह दावे वायरल हुए तो गुलाम-ए-मुर्तज़ा ने अपने फ़ेसबुक पेज पर इसके फ़र्ज़ी होने और उनके पिता के स्वस्थ होने की पुष्टि की थी | उन्होंने कहा था, "मेरे पिता ज़िंदा हैं और एक बेहतरीन गायक हैं | मैं उनका बेटा होने पर गर्व करता हूँ | मेरे पिता आर्मी अफसर नहीं है पर वे किसी आर्मी अफसर से कम भी नहीं हैं | मैं अपने पिता और दादा शहज़ाद अख़्तर के साथ इस स्टेज पर प्रदर्शन कर रहा हूँ | आप लोगों से विनम्र निवेदन है की इस तरह के फ़र्ज़ी पोस्ट को फ़ेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आगे न बढ़ाएं | मैं अपने पिता और परिवार से प्यार करता हूँ | कृपया शेयर करें |"

गुलाम-ए-मुर्तज़ा की पोस्ट
Claim Review :   वीडियो में दावा किया गया है की गाना गा रहा बच्चा एक शहीद फ़ौजी का बेटा है जिसके पिता की मृत्यु आतंकवादियों के हाथों हुई थी
Claimed By :  Facebook pages
Fact Check :  FALSE
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