पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल: 7 चीजें जो आपको जाननी चाहिए

एनआरएस मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों पर हमले के बाद से डॉक्टर हड़ताल पर हैं । राज्य भर में चिकित्सा सुविधाएं ठप हो गई हैं । अब पश्चिम बंगाल देश भर में मेडिकल बिरादरी को विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा है

पश्चिम बंगाल में चल रही मेडिकल हड़ताल में ज़ल्द ही शायद नई आशा कि किरण दिखाई दे सकती है, जैसा कि कई राज्य के अस्पतालों के एमर्जेंसी वार्डों में सीनियर डॉक्टरों के कहने पर सेवाओं को फ़िर से शुरू करने की उम्मीद है । पिछले चार दिनों से राज्य के डॉक्टर हड़ताल पर है । नील रतन सरकार (एनआरएस) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक रोगी की मौत के बाद उसके परिजनों की जूनियर डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट हुई थी । इसके बाद राज्यभर के अधिकतर सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा सेवाएं ठप हैं ।

देश भर के चिकित्सा बिरादरी ने विरोध करने वाले डॉक्टरों का साथ देते हुए 14 जून को ऑल इंडिया प्रोटेस्ट डे का आयोजन किया । यहां हम बताएंग कि क्यों एक विरोध, देश भर के डॉक्टरों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन में बदल गया ।

घटना क्रम

बीमारी के कारण, पचहत्तर वर्षीय मोहम्मद सईद ने सोमवार शाम को एनआरएस मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया । हालांकि उनके परिवार ने इलाज़ में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया और जूनियर डॉक्टरों के साथ मार-पीट की । बाद में, जब मृतक का परिवार शरीर लेने के लिए वापस लौटा, तो डॉक्टरों ने कथित दुर्व्यवहार के लिए माफ़ी मांगने की मांग रखी । इसके तुरंत बाद, ’इंटर्न’ डॉक्टरों और मरीज के परिवार के बीच झड़पें हुईं, जिससे दो इंटर्न परिबाह मुखर्जी और यश टेकवानी को गंभीर चोटें आईं । जबकि डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि उन पर हमला करने के लिए दो ट्रक भर कर लोग आए थे, वहीं पुलिस का कहना है कि बाहर से डॉक्टर पर नारियल फेंकने के कारण मुखर्जी घायल हुए ।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि इस संबंध में चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया था ।



अभिषेक बनर्जी की अपील सफल नहीं हुई

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार दोपहर तक स्थिति को सम्बोधित करने में देरी की है । कोलकाता के सबसे पुराने राजकीय अस्पतालों में से एक मंगलवार (11 जून) को बंद रहा, डायमंड हार्बर के सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे, अभिषेक बनर्जी ने पहली बार तृणमूल कांग्रेस की औपचारिक प्रतिक्रिया दी ।

संयोग से, मुख्यमंत्री के पास स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पोर्टफोलियो भी है । उस शाम बाद में, स्वास्थ्य सचिव राजीव सिन्हा ने जूनियर डॉक्टरों को सेवाओं को फ़िर से शुरू करने की अपील जारी की ।

डॉक्टरों के लिए मुख्यमंत्री की अंतिम चेतावनी

गुरुवार दोपहर, ममता बनर्जी ने जूनियर डॉक्टरों को चार घंटे का अल्टीमेटम दिया - या तो वे सेवाएं फ़िर से शुरू करें या हॉस्टल से निकाले जाने के लिए तैयार रहें । इसके बाद एसएसकेएम अस्पताल में हलचल मच गई, जैसा कि बनर्जी ने जूनियर डॉक्टरों पर विस्फोटक टिप्पणी की और उन्हें 'बाहरी' करार दिया । उन्होंने यह भी कहा, "यह भाजपा और सीपीएम द्वारा एक पूर्ण साज़िश है ।" जिसका, डॉक्टरों ने "शेम-शेम" और "हमें न्याय चाहिए" के नारे के साथ एकजुट होकर विरोध किया । इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए बनर्जी का विवादित स्वर का परिणाम कई अन्य अस्पतालों के डॉक्टरों के बीच सामूहिक इस्तीफ़े या इस्तीफ़े धमकी के रुप में सामने आया ।



सीनियर डॉक्टरों से बनर्जी की नरम अपील

गुरुवार की देर शाम, सीनियर डॉक्टरों को एक पत्र भेजा गया था और उनसे अनुरोध किया कि वे सहयोग करें और गरीब लोगों को तत्काल चिकित्सा देने से इंकार न करें । बनर्जी ने पत्र में लिखा, “यदि आप सभी अस्पतालों का पूरा ध्यान रखते हैं, तो मैं बाध्य और सम्मानित होऊंगी । अस्पतालों को सुचारू रूप से और शांति से चलना चाहिए ।”



अपने विचार शेयर करने के लिए ममता बनर्जी ने फ़ेसबुक का इस्तेमाल भी किया।

हड़ताल का प्रभाव देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के रुप में

पश्चिम बंगाल में हड़ताल का साथ देते हुए, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने शुक्रवार को अखिल भारतीय विरोध दिवस की घोषणा की है । दोपहर तक, देश भर के चिकित्सकों ने मौन मार्च का नेतृत्व किया और विरोध के निशान के रूप में काले बैंड पहने ।









हड़ताल में विपक्ष की भूमिका

जहां डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री पर संकट को दूर करने में विफल रहने का आरोप लगाया, वहीं बीजेपी ने इस स्थान पर कब्ज़ा करने और विरोध का राजनीतिकरण करने का राजनीतिक अवसर भी देखा । बीजेपी के एक प्रमुख नेता मुकुल रॉय ने सांप्रदायिक कहानी और एक निश्चित समुदाय के लोगों ने डॉक्टरों पर हमले कैसे शुरू किए, इसका संकेत दिया । रॉय ने बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी के साथ डॉक्टरों का दौरा किया और उनके साथ खड़े रहने की पेशकश की । इस बीच सीपीएम समर्थित सर्विस डॉक्टर्स फ़ोरम ने राज्य के सभी चिकित्सा संस्थानों में आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) को बंद करने की मांग की ।

राज्यपाल का हस्तक्षेप

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने गुरुवार को राज्य के जूनियर डॉक्टरों से काम फ़िर से शुरू करने और रोगियों के हित में जारी चिकित्सा गतिरोध को समाप्त करने की अपील की । जूनियर डॉक्टरों का सीज़फायर जारी है ।

स्वास्थ्य सेवा से वंचित के लिए व्यापक प्रतिवाद

पिछले दो दिनों में पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में जरुरतमंद रोगियों के परिवार द्वारा इस हड़ताल का प्रतिवाद किया गया ।

रोगियों के परिवारों द्वारा मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में प्रकोप से लेकर उत्तर बंगाल में सड़क ब्लॉक करने तक चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह से बंद करने का मतलब है कि जरूरतमंद मरीज सरकारी अस्पतालों में चल रहे संकट से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं ।

Next Story