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क्या ये तस्वीर वाकई गैस के दाम बढ़ने से परेशान केरल की महिलाओं की है?

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क्या ये तस्वीर वाकई गैस के दाम बढ़ने से परेशान केरल की महिलाओं की है?

ओडिसा में हुए एक विरोध प्रदर्शन से एक तस्वीर को संपादित किया गया है और दावा किया जा रहा है कि सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तुलना में एलपीजी मूल्य में वृद्धि से केरल की महिलाएं ज्यादा परेशान हैं।

 

मलयालम वेबसाइट Eyewitnessnews.in का एक लेख व्यापाक रुप से साझा किया जा रहा है। इस लेख में भुवनेश्वर से 2017 की तस्वीर का उपयोग किया गया है और साथ ही दावा किया गया है कि सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तुलना केरल में महिलाएं एलपीजी मूल्य में बढ़ोतरी से ज्यादा परेशान हैं।

 

इस लेख ने तस्वीर को मुख्य तस्वीर के रूप में उपयोग किया है और मलयालम में शीर्षक कहता है, ‘महिलाओं ने कोट्टारकर, कोल्लम में घरों का दौरा करने वाले और सबरीमाला मुद्दे पर हस्ताक्षर एकत्र करने वाले बीजेपी नेताओं को गैस सिलेंडर बिल दिखाकर किया विरोध।’

 

मूल पाठ कहता है, “കൊല്ലം കൊട്ടാരക്കരയിൽ ശബരിമല വിഷയത്തിൽ ഒപ്പു ശേഖരണത്തിന് വീടുകളിൽ ചെന്ന ബിജെപി നേതാക്കൾക്ക് നേരെ ഗ്യാസ് സിലിണ്ടർ ബിൽ കാണിച്ചു സ്ത്രീകളുടെ പ്രതിഷേധം”

 

Eyewitnessnews के फेसबुक पोस्ट को लगभग 5000 शेयर प्राप्त हुए हैं, जबकि वामपंथ की ओर झुकाव वाले फेसबुक पेज, वी लव सीपीआईएम ने इस लेख को शेयर किया जिसे करीब 2000 बार और शेयर किया गया है।

 

 

पोस्ट के संग्रहीत संस्करण के लिए यहां क्लिक करें।

 

 

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कहानी को फेसबुक ग्रूप एसडीपीआई केरलम पर भी साझा किया गया था, जिसमें लगभग 100 शेयर प्राप्त हुए थे।

 

 

 

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एक गूगल रिवर्स इमेज सर्च से हमने अगस्त 2017 से टेलीग्राफ इंडिया द्वारा एक लेख पाया है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तस्वीर ओडिसा के भुवनेश्वर से है, जब एलपीजी सिलेंडरों पर सब्सिडी समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ राजनीतिक पार्टी बिजू जनता दल (बीजेडी) की महिलाओं के विंग द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। यह तस्वीर उनके संवाददाता अश्विनी पाटी ने कैमरे में कैद किया था। लेख को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

 

 

 

हालांकि, Eyewitness का लेख यह नहीं कहता है कि महिलाओं ने गैस सिलेंडरों का उपयोग करके विरोध किया, लेख में दावा किया गया है कि जब बीजेपी नेता उनसे समर्थन पर हस्ताक्षर कराने आए तो कुछ महिलाओं ने उन्हें एलपीजी गैस बिल दिखाए। रिपोर्टों का हवाला देते हुए, लेख दावा करता है कि महिलाओं को सबरीमाला में प्रवेश करने की आवश्यकता है या नहीं, यह निर्णय लेने से पहले महिलाओं ने उनसे एलपीजी के दाम ठीक करने के लिए कहा। लेख में आगे कहा गया है कि बीजेपी और कांग्रेस राजनीतिक रूप से स्कोर करने के लिए मिलकर काम कर रही हैं, जिसने लोगों को उनके असली राजनीतिक इरादे के बारे में उलझा दिया है।

 

बूम को इस घटना की रिपोर्ट करने वाले अन्य मलयालम दैनिक समाचार पत्र नहीं मिला है। और, हालांकि सिलेंडर धारण करने वाली महिलाओं की तस्वीर केरल का नहीं था, लेकिन Eyewitness ने यह निर्दिष्ट नहीं किया कि यह एक प्रतिनिधित्व छवि है। इसके अलावा, यह स्पष्ट है कि इस तथ्य को छिपाने के प्रयास थे कि तस्वीरें ओडिसा से हैं।

 

मूल तस्वीर और Eyewitness द्वारा उपयोग की गई तस्वीर की तुलना से पता चलता है कि इसे महिलाओं के पीछे बैनर में उडिया पाठ को कवर करने के लिए संपादित किया गया है। और क्योंकि तस्वीर को काट-छांट किया गया है, उनकी गर्दन के चारों ओर लिपटे स्कार्फ पूरी तरह से दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालांकि, मूल तस्वीर (दाईं तरफ की तस्वीर देखें) से पता चलता है कि स्कार्फों में कौंच है, जिस पर बीजेडी का लोगो मुद्रित है।

 

 

 

 

बूम को विरोध प्रदर्शन की एक अन्य तस्वीर, WomanOdisha नामक वेबसाइट से भी मिली है। नीचे लेख का एक स्क्रीनशॉट है।

 

 

 


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Sneha Alexander is a policy analyst and writes data fact checks. She enjoys looking for stories behind the numbers and presents it to the reader in a friendly format. She has fact-checked some of the country's top ministers and media publications for the wrong use of data. Her fact check stories have been carried by several other prominent digital websites.

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