कॉलेज स्ट्रीट हिंसा में बीजेपी की भूमिका का सबूत दिखाते हुए पुरानी तस्वीरें हो रहीं हैं शेयर

बूम ने पाया कि एक तस्वीर भारत बंद (2012) के दौरान जमशेदपुर में हुए विरोध की है, दूसरी, 2010 में लखनऊ में हुई झड़पों की है।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकर्ताओं को दंगे करते हुए दिखाती दो पुरानी तस्वीरें ऑनलाइन शेयर की जा रही हैं। 14 मई, 2019 को कोलकाता में अमित शाह के रोड शो के दौरान हिंसा हुई थी। कुछ लोगों का दावा था कि इस हिंसा के पीछे पार्टी का ही हाथ है और इन तस्वीरों को इसका 'प्रमाण’ होने के दावे के साथ फैलाया जा रहा है। यह दावा गलत है।

इस लेख को लिखे जाने तक इस तस्वीर को 1400 से अधिक बार शेयर किया गया है और साथ ही व्यंगात्मक कैप्शन लिखा गया है, “ये हैं भाजपा के सीधे साधे भोले भाले कार्यकरता जो एक स्वच्छ छवि वाले नेता “अमित शाह” के इशारे पर शान्ति पूर्ण तरीके से बंगाल में रोड़ शो कर रहे हैं !”

पोस्ट को नीचे देखा जा सकता है, और यहां इसका अर्काइव्ड वर्शन है।

फ़ैक्टचेक

जब शाह का क़ाफ़िला इलाके से गुजर रहा था, भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच शाम को कॉलेज स्ट्रीट में झड़प हुई थी और बूम ने पाया कि तस्वीरें दिन के उजाले की हैं। यह इन तस्वरों के फ़र्ज़ी होने का पहला संकेत देती है।



हमने फिर दोनों तस्वीरों पर एक रिवर्स इमेज सर्च किया और पाया कि दोनों पुराने और असंबंधित थे। पहली तस्वीर, जहां दो लोगों को एक ट्रक के विंडशील्ड को नष्ट करते हुए देखा जा सकता है, मूल रूप से जमशेदपुर की है। यह तस्वीर सात साल पुरानी है और देशव्यापी विरोध का हिस्सा है जो पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण हुआ था । तस्वीर को समाचार एजेंसी पीटीआई ने शूट किया था ।

दूसरी तस्वीर में, राजनेताओं के प्लाकार्ड और पोस्टर हैं जो बंगाल से नहीं हैं। तस्वीर में, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की फोटो के साथ लिखा गया है, "सेतु गोमती टैट।"

बूम ने फिर उत्तर प्रदेश में हिंसा के साथ कीवर्ड सर्च चलाई और 2010 में बढ़ती कीमतों के कारण बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन के समाचार रिपोर्टों तक पहुंचे।

Claim Review :   कॉलेज स्ट्रीट हिंसा में बीजेपी की भूमिका
Claimed By :  FACEBOOK PAGES
Fact Check :  FALSE
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