असम में महिला की बेंत से पिटाई का वीडियो बंगाल बता कर किया गया वायरल

बूम ने पाया की वीडियो 2017 में शूट किया गया था जिसमें महिला को पीटने का निर्णय गांव के मुखिया ने लिया था

'भारत माता की जय' फ़ेसबुक पेज पर एक वीडियो क्लिप पोस्ट किया गया है | क्लिप में एक आदमी बेरहमी से एक महिला के पैरो पर डंडे से मारता नज़र आता है | इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है की पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं पर शरिया कानून के तहत अत्याचार हो रहे हैं | यह दावा झूठा है और असल वीडियो असम से है ना की पश्चिम बंगाल से |

वीडियो 1 मिनट 46 सेकंड का है जिसे इस लेख को लिखने तक 600 बार शेयर किया जा चूका है | वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है, "पश्चिम बंगाल में शरिया कानून के तहत लोगों पे हो रहे अत्याचार ज्यादातर बांग्लादेशी रोहिंग्या मुसलमान बहुल क्षेत्रों रहे हिन्दुओं पर अत्याचार पर कोई सुनने वाला नहीं है ।सेक्युलरीझम के कीड़े कहाँ हो, कहाँ है भारत का संविधान ।"

वीडियो को देखने के लिए विवेक का इस्तमाल करें | हम वीडियो को लेख के साथ नहीं दिखा रहे हैं | इस वीडियो को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें एवं इसका आर्काइव्ड वर्शन यहाँ देखें |

फ़ैक्ट चेक

बूम ने रिवर्स इमेज सर्च किया तो हमें पता चला की यह वीडियो 2017 का है | इसके बाद हमने गूगल सर्च किया जिसमें हमने 'Woman beaten under Shariah Law in West Bengal' कीवर्ड्स इस्तमाल किया परन्तु इसका कोई परिणाम नहीं निकला | इसके बाद हमने बंगाल के आस पास के राज्यों के नाम से भी सर्च किया जिसमें असम भी शामिल था | हमें असम में हुई एक घटना पर इंडिया टुडे का एक लेख मिला जिसमें इसी वीडियो के बारे में विवरण दिया हुआ था |

यांडेक्स खोज का परिणाम
इंडिया टुडे के लेख का स्क्रीनशॉट

लेख में इस घटना के बारे में बताया गया है की: एक महिला को मूर्खतापूर्ण तरीके से असम में नागाओं ज़िले के ढिंग इलाके में मारा जा रहा है | इस महिला ने कोई छोटा अपराध किया था जिसके बाद गाँव के बड़े बुज़ुर्गों ने महिला को इस तरह मारने का फ़ैसला सुनाया | यह वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक शख़्स बेंत से एक महिला के पैरों पर मार रहा है जिसके चलते महिला नीचे गिर जाती है |

इस लेख को जून 2017 में प्रकाशित किया गया था |

Claim Review :  पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं पर शरिया कानून के तहत अत्याचार हो रहे हैं
Claimed By :  Facebook pages
Fact Check :  FALSE
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