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फैक्ट चेक

नेपाल बाढ़: तीन दिनों बाद बच्ची को मलबे से बाहर निकालने का यह वीडियो असली नहीं है

बूम ने जांच में पाया कि यह घटना का वास्तविक वीडियो नहीं है. इसे एआई की मदद से क्रिएट किया गया है.

By -  Jagriti Trisha
Published -  8 Sept 2026 3:25 PM IST
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    Rescue team pulls a six-year-old girl from flood debris in Nepal: AI Video

    सोशल मीडिया पर नेपाल में आई बाढ़ के मलबे से रेस्क्यू टीम द्वारा एक छह वर्षीय बच्ची को बाहर निकालने का वीडियो वायरल है. दावा किया जा रहा है कि नेपाल के रसुवा जिले में मलबे में दबी छह वर्षीय बच्ची मनीषा को तीन दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया.

    बूम ने पाया कि यह नेपाल के रसुवा जिले में रेस्क्यू टीम द्वारा बच्ची को बचाए जाने की घटना का वास्तविक वीडियो नहीं है. इसे एआई की मदद से निर्मित किया गया है.

    सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?

    एक्स और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल करीब तीस सेकंड के इस वीडियो में रेस्क्यू टीम एक बच्ची को मलबे से निकालती और बाद में उसे खाना खिलाती नजर आ रही है.

    इसके साथ दावा किया जा रहा है कि नेपाल रसुवा जिले में एक चमत्कारी घटना देखने को मिली, जहां बचाव दल को मलबे के नीचे से रोने की आवाज सुनाई दी और करीब 60 घंटे से कीचड़ और मलबे में दबी छह वर्षीय मनीषा को जिंदा बाहर निकाला गया.

    ANOTHER DEVASTATING VISUAL FROM NEPAL FLOODS

    6 YEAR OLD FOUND ALIVE AFTER 60 HOURS UNDER DEBRIS

    Buried beneath mud and debris for nearly 60 hours, 6 year old Manisha was found alive after rescuers heard a faint cry coming from beneath the wreckage in Rasuwa.

    Rescuers dug… pic.twitter.com/VdSacl07TB

    — Ravi Prakash Official (@raviprakash_rtv) August 31, 2026

    आर्काइव लिंक यहां और यहां देखें.

    पड़ताल में क्या मिला:

    यह घटना का वास्तविक वीडियो नहीं है

    बूम ने रसुवा जिले में हुई इस घटना से संबंधित कीवर्ड सर्च किया तो पाया कि यह घटना का वास्तविक वीडियो नहीं है. नेपाल आर्म्ड फोर्स के सोशल मीडिया पर मूल वीडियो मौजूद है, जो कि इस वीडियो से मेल नहीं खाता.

    हमने पाया कि मूल वीडियो को आधार बनाकर वायरल वीडियो को तैयार किया गया है, क्योंकि इसमें भी रेस्क्यू टीम द्वारा वायरल वीडियो जैसे बच्ची को खिलाने के दृश्य शामिल हैं.


    नेपाल आर्म्ड फोर्स और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक घटना नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे गांव की है. मिट्टी के नीचे से चीखने की आवाज सुनने के बाद एपीएफ की टीम ने मलबे में दबी छह वर्षीय बच्ची मनीषा को जिंदा बाहर निकाला, जिसे बाद में इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया.

    वीडियो में मौजूद विसंगतियां

    गौर से देखने पर हमें वीडियो में कई विसंगतियां नजर आईं. मसलन, इसमें बच्ची के चेहरे की बनावट मशीनी लगती है और तीन दिन मलबे में दबे रहने के बाद भी उसकी शारीरिक हालत सामान्य दिखती है. खाना खिलाने वाले दृश्य में भी चीजें मानवीय नहीं नजर आतीं, वहीं रेस्क्यू टीम की नेम प्लेट की लिखावट भी अस्पष्ट है.



    पड़ताल के लिए हमने इसे AI डिटेक्शन टूल Hive Moderation और NVIDIA पर चेक किया. इन टूल्स ने वीडियो के एआई जनरेटेड होने की संभावना जताई.



    DAU में हमारे सहयोगियों का विश्लेषण

    पुष्टि के लिए हमने Deepfakes analysis unit (DAU) के सहयोगियों की भी मदद ली. उन्होंने तमाम विसंगतियों के साथ-साथ ये भी गौर किया कि एक दृश्य में सुरक्षाकर्मियों के हाथों में भी कुछ गड़बड़ियां दिखाई दे रही हैं. एक सुरक्षाकर्मी का हाथ थोड़ा विकृत दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरे की उंगलियां गायब होती नजर आ रही हैं.


    यह भी पढ़ें -नेपाल बाढ़ में तेज बहाव के कारण पुल टूटने के दावे से वायरल वीडियो फेक है


    Tags

    NepalFloodsArtificial Intelligence
    Read Full Article
    Claim :   वीडियो में देख सकते हैं कि रेस्क्यू टीम ने नेपाल के रसुवा जिले में मलबे में दबी 6 साल की बच्ची को तीन दिन बाद जिंदा बाहर निकाला.
    Claimed By :  Social Media Posts
    Fact Check :  Misleading
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