फैक्ट चेक: आरक्षण खत्म करने के दावे से मायावती का फर्जी बयान वायरल
मायावती ने अपने एक्स हैंडल पर ठीक इससे उलट कहा कि आरक्षण सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति का महत्वपूर्ण साधन है. इसपर राजनीति नहीं करना चाहिए.

सोशल मीडिया पर बसपा सुप्रीमो मायावती के नाम पर एक बयान वायरल है, जिसमें उनके हवाले से ओबीसी और दलित आरक्षण समाप्त करने की बात की गई है.
बूम ने जांच में पाया कि मायावती ने आरक्षण पर इस तरह का कोई बयान नहीं दिया. उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर ठीक इससे उलट लिखा कि सदियों से सताए एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिए आरक्षण सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति का रास्ता है ऐसे में 'क्रीमी लेयर' की बात करना अनुचित है.
सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?
मायावती के बयान के हवाले से वायरल पोस्टकार्ड में ब्रेकिंग न्यूज की तरह 'आरक्षण मुक्त भारत’ बनाने की बात कही गई है. उन्हें कोट करते हुए लिखा गया है कि आजादी के बाद से देश में काफी बदलाव हो चुका है, इसलिए अब ओबीसी और दलित आरक्षण समाप्त कर देना चाहिए.
फेसबुक पर एक यूजर ने इस पोस्टकार्ड को शेयर करते हुए लिखा, 'ओबीसी और दलित आरक्षण अब समाप्त कर देना चाहिए - बहन मायावती जी. '
पड़ताल में क्या मिला:
वायरल बयान मनगढ़ंत है
हमने मायावती के इस बयान से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट की तलाश की, लेकिन ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें कहा गया हो कि उन्होंने आरक्षण समाप्त करने की बात कही हो.
इस दावे के ठीक विपरीत मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि मायावती ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए गए बयान की आलोचना करते हुए आरक्षण का समर्थन किया और इसे जातिवादी उत्पीड़न से सुरक्षा का संवैधानिक जरिया बताया.
असल में मोहन भागवत ने मुंबई में एक कार्यक्रम में जातिगत आरक्षण पर बोलते हुए कहा था कि जिन लोगों को अब आरक्षण के फायदों की जरूरत नहीं है, उन्हें स्वेच्छा से छोड़ देना चाहिए. इस बयान के बाद 9 अगस्त को बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इसका जवाब देते हुए एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया.
मायावती ने अपने पोस्ट में आरक्षण का समर्थन किया
इस पोस्ट में उन्होंने आरक्षण को जाति के आधार पर सताए गए एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक मुक्ति और आत्म-सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया. साथ ही उन्होंने क्रीमी लेयर की बात को अनुचित बताते हुए कहा कि यह बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी संविधान के उद्देश्यों के विरुद्ध है.
पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि RSS प्रमुख का बयान जातिवादी और संकीर्ण है. इससे संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना होती है क्योंकि आरक्षण मूलतः सदियों से जातिवादी व्यवस्था के शिकार शोषित-पीड़ित लोगों को मानवीय आधार पर समता व समानता का संवैधानिक अधिकार देता है.
उन्होंने आरक्षण पर राजनीति न करने की सलाह देते हुए यह भी कहा कि आरक्षण में किसी भी प्रकार के बदलाव की वकालत बंद कर एक समतामूलक समाज की स्थापना के संवैधानिक उद्देश्यों को पूरा करने में सहयोग करना ही बेहतर होगा, यही समय की मांग है.


