RSS के कार्यक्रम में जाने से प्रमोशन होने की बात जस्टिस स्वर्णकांता ने नहीं कही
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो साल 2024 में काशी विद्यापीठ में आयोजित एक कार्यक्रम का है, जहां भाषण में स्वर्णकांता शर्मा ने अपने आगे बढ़ने का श्रेय भगवान शिव और विश्वविद्यालय को दिया था.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने के बाद से वह चर्चा में आ गई हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसके साथ दावा किया जा रहा है कि जस्टिस शर्मा ने अपने भाषण में कहा कि जब भी वह RSS के कार्यक्रमों में जाती हैं, उनका प्रमोशन हो जाता है.
बूम ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा गलत है. वीडियो मई 2024 में काशी विद्यापीठ में आयोजित एक वर्कशॉप का है, जहां भाषण में स्वर्णकांता शर्मा ने अपने आगे बढ़ने का श्रेय बाबा यानी भगवान शिव और विश्वविद्यालय को दिया था न कि RSS को.
गौरतलब है कि आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की रिहाई को लेकर CBI ने चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा कर रही हैं. केजरीवाल ने एक याचिका दायर कर मांग की थी कि जस्टिस शर्मा खुद को इस मामले से अलग कर लें. हालांकि जस्टिस शर्मा ने इस अर्जी को खारिज कर दिया.
उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने यह दावा किया था कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा RSS से जुड़ी संस्थाओं के कार्यक्रमों में शामिल होती रही हैं. उनका कहना था कि चूंकि इस मामले में सभी आरोपी RSS की विचारधारा के विरोधी हैं, ऐसे में जस्टिस शर्मा इस केस में निष्पक्ष निर्णय कैसे दे पाएंगी.
सोशल मीडिया पर क्या है वायरल?
एक्स पर आम आदमी पार्टी से जुड़े देवेश विश्वकर्मा और राकेश यादव ने इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया कि दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता जी स्वयं स्वीकार कर रही हैं कि जब-जब वह RSS-भाजपा के कार्यक्रमों में जाती हैं, उनका प्रमोशन हो जाता है.
आर्काइव लिंक यहां और यहां देखें.
समाजवादी पार्टी के नेता आईपी सिंह ने भी जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के इस वीडियो को इसी दावे के साथ शेयर किया है. (आर्काइव लिंक)
पड़ताल में क्या मिला:
वीडियो दो साल पहले काशी विद्यापीठ में आयोजित एक कार्यक्रम का है
वायरल वीडियो में हमें पोडियम पर वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और विधि संकाय का नाम लिखा नजर आया. यहां से हिंट लेकर संबंधित कीवर्ड सर्च करने पर हमें काशी विद्यापीठ के लॉ डिपार्टमेंट के एक्स हैंडल पर 20 मई 2024 की एक पोस्ट मिली, जिसमें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की तस्वीर समेत कार्यक्रम की कई तस्वीरें साझा की गई थीं.
पोस्ट में मौजूद तस्वीरें वायरल वीडियो के विजुअल से मेल खाती हैं, जैसे पीछे लगा बैनर और जस्टिस शर्मा के कपड़े. इन तस्वीरों को देखने पर पता चलता है कि वीडियो वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि संकाय द्वारा 19 मई 2024 को 'Relevance of New Criminal Laws in Changing India' विषय पर आयोजित एक दिवसीय वर्कशॉप का है, जिसमें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई थीं.
मूल भाषण में वह अपने आगे बढ़ने का श्रेय RSS को नहीं दे रहीं
संबंधित कीवर्ड की मदद से हमें लॉ फैकल्टी, काशी विद्यापीठ के फेसबुक पेज पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के भाषण का वीडियो भी मिला. मूल भाषण के वीडियो में 38 सेकंड पर जस्टिस शर्मा कहती हैं, "मैं जब-जब बनारस आई हूं, बाबा (भगवान शंकर) ने मुझे कुछ दिया है. मैं जब भी बोलना शुरू करती हूं तो उसका प्रारंभ महादेव से होता आया है... मुझे बाबा का स्नेह और इस विश्वविद्यालय से रंजन जी और शिल्पी जी का स्नेह यहां खींच कर लाता है तो हर बार एक नई सौगात से लाता है.
फिर आगे वायरल वीडियो वाला हिस्सा आता है जहां वह कहती हैं, "जब आपने मुझे पहली बार यहां आमंत्रित किया तो मैं सिर्फ एक सेशन जज थी. जब आपने उसके अगले साल मुझे आमंत्रित किया तो मैं फैमिली कोर्ट की डिस्ट्रिक्ट जज थी. उसके अगले साल जब आपने आमंत्रित किया तो मैं डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज थी और जब आज आपने मुझे आमंत्रित किया है तो आपने मुझे, बाबा ने मुझे हाईकोर्ट का जज बना दिया है. इसके लिए मुझे आपसे धन्यवाद कहना चाहिए कि आप मुझे यूं ही बुलाते रहे और बाबा मुझे कुछ-कुछ बनाते रहें."
आगे के हिस्से में वह तय विषय पर अपनी बात रखती नजर आती हैं. पूरे वीडियो में वह RSS का जिक्र नहीं करतीं. हम इस कार्यक्रम में किसी आरएसएस से जुड़े व्यक्ति की मौजूदगी या जस्टिस शर्मा के आरएसएस से संबंधों की पुष्टि नहीं कर सकते लेकिन इतना साफ है कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. वीडियो RSS से संबंधित कार्यक्रम का नहीं बल्कि वाराणसी के काशी विद्यापीठ विश्विद्यालय में आयोजित एक वर्कशॉप का है.
लाइव हिंदुस्तान की वेबसाइट पर भी इस कार्यक्रम से संबंधित खबर देखी जा सकती है. लॉ फैकल्टी, काशी विद्यापीठ के यूट्यूब पर मौजूद एक वीडियो से स्पष्ट होता है कि जस्टिस शर्मा पहले भी संस्थान द्वारा आयोजित कार्यकर्मों में हिस्सा ले चुकी हैं.


