रमजान में कपल के साथ दिखने पर निकाह कराने के दावे से जामिया की फेक नोटिस वायरल
जामिया प्रशासन ने 'निकाह' संबंधी इस नोटिस को फर्जी बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई.

सोशल मीडिया पर दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय का एक कथित नोटिफिकेशन वायरल हो रहा है. इस नोटिफिकेशन में विश्विद्यालय की ओर से कहा गया है कि रमजान के महीने में यदि कोई कपल (लड़का-लड़की) साथ दिखता है तो उनका तुरंत निकाह करवा दिया जाएगा.
बूम ने फैक्ट चेक में पाया कि जामिया ने आधिकारिक तौर पर इस तरह की कोई नोटिस जारी नहीं की है. जामिया प्रशासन ने इस संबंध में एक स्पष्टीकरण जारी कर वायरल हो रही नोटिस को फर्जी बताया और कहा कि इसे यूनिवर्सिटी की छवि खराब करने के उद्देश्य से सर्कुलेट किया गया है.
सोशल मीडिया पर क्या वायरल?
जामिया के लेटरहेड वाली इस वायरल नोटिस में लिखा है, "रमजान के पवित्र महीने में कपल (लड़का और लड़की) का एक साथ खड़ा होना पूरी तरह मना है. अगर कोई कपल एक साथ खड़ा पाया जाता है तो उनका निकाह तुरंत करवा दिया जाएगा. कृपया यूनिवर्सिटी की पवित्रता का सम्मान करें और बेवजह पास आने से बचें!"
इसमें आगे एक नोट में यह भी कहा गया कि नियम तोड़ने पर उनको अपना वलीमा खुद करवाना होगा. इस कथित नोटिस पर 20 फरवरी 2026 की तारीख दर्ज है और रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं.
यूजर्स इस नोटिफिकेशन को सच मानकर शेयर कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि जामिया रमजान के महीने में परिसर के अंदर एक साथ देखे जाने पर लड़के-लड़कियों का निकाह करवा रहा है.
एक एक्स यूजर ने इसको शेयर करते हुए लिखा,'अगर ये सच है तो जिस-जिस का निकाह नहीं हो पा रहा है वो जामिया पहुंच कर जामिया के प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं.' (आर्काइव लिंक)
पड़ताल में क्या मिला:
वायरल नोटिस में हैं गड़बड़ियां
वायरल नोटिफिकेशन पहली नजर में ही संदिग्ध लगता है क्योंकि इसकी भाषा औपचारिक नहीं है. एक लोकतांत्रिक देश में किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा ऐसा आदेश जारी किया जाना इसे और संदेहास्पद बनाता है.
हमने गौर किया कि नोटिस पर इसे जारी करने की तारीख 20 फरवरी 2026 दी गई है जबकि नीचे डिप्टी रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर के साथ 20 जनवरी 2026 की तारीख दर्ज है. तारीखों में विरोधाभास संकेत देते हैं कि यह नोटिफिकेशन असली नहीं है बल्कि इसे एडिट कर तैयार किया गया है.
जामिया ने किया इसका खंडन
पड़ताल के दौरान हमें जामिया की आधिकारिक वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट पर वायरल नोटिफिकेशन नहीं मिला. इस नोटिफिकेशन के वायरल होने के बाद इसकी गंभीरता को देखते हुए जामिया ने अपने फेसबुक पेज और वेबसाइट पर इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया और इसे फेक बताया.
जामिया ने इस सर्कुलर में कहा, '20.02.2026 का नोटिफिकेशन नंबर C&O-9(2)/RO/2026- जिसमें रमजान के दौरान किसी लड़के और लड़की के साथ खड़े पाए जाने पर निकाह कराने की बात कही गई है, यह पूरी तरह फर्जी है. विश्विद्यालय प्रशासन ने ऐसा कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है. इसे सीरियसली न लें क्योंकि इसे यूनिवर्सिटी की छवि खराब करने के उद्देश्य से सर्कुलेट किया गया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन इसकी निंदा करता है. प्रशासन ने साइबर सेल, दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.'
संबंधित कीवर्ड सर्च करने पर हमें ऐसे कुछ और सर्कुलर भी मिले, जिनमें पाकिस्तान स्थित बहरिया यूनिवर्सिटी, बहाउद्दीन जकारिया यूनिवर्सिटी मुल्तान, COMSATS यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मॉडर्न लैंग्वेजेज के हवाले से हुबहू इसी तरह के दावे किए गए थे. इसमें बहरिया यूनिवर्सिटी के रेफरेंस नंबर को छोड़कर जामिया सहित सभी के रेफरेंस नंबर सेम हैं. बहरिया यूनिवर्सिटी ने भी अपने सोशल मीडिया के जरिए इसका खंडन करते हुए इसे फर्जी बताया है.



