जर्मनी का पुराना वीडियो अमेरिका से अवैध प्रवासियों को बाहर करने के दावे से वायरल
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो बर्लिन का है. दिसंबर 2024 में फिलीस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी.



प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करती जर्मनी पुलिस का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. यूजर्स वीडियो को इस गलत दावे से शेयर कर रहे हैं कि अमेरिका अवैध प्रवासियों को पकड़-पकड़ कर उनको उनके देश भेज रहा है.
बूम ने अपनी जांच में पाया कि यह वायरल वीडियो दिसंबर 2024 में बर्लिन में हुए एक प्रदर्शन का है. फिलीस्तीनी समर्थक प्रदर्शनकारी बर्लिन के मुख्य रेलवे स्टेशन पर इजरायल के गाजा पर हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर यह कार्रवाई की थी.
गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में वापस लौटने के बाद अमेरिका में रह रहे अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश भेजने की प्रकिया तेज हो गई है. बीते दो सप्ताह में तीन विमानों से 332 अवैध अप्रवासी भारतीयों को वापस भेजा गया है. इसी संदर्भ में जर्मनी का यह वीडियो गलत दावे से वायरल हो रहा है.
फेसबुक पर एक यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, ‘अमेरिका में अवैध प्रवासियों को पकड़ कर अपने-अपने देश भेजा जा रहा है.’

एक अन्य यूजर ने इसी वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, ‘अमेरिका में अमेरिकन पुलिस अलग-अलग देशों के रह रहे लोगों को पकड़ कर उनके देश भेजा जा रहा है.’
फैक्ट चेक
बूम ने दावे की पड़ताल के लिए इस वायरल वीडियो को गूगल लेंस से सर्च किया. हमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई यूजर द्वारा दिसंबर 2024 में शेयर किया गया यह वीडियो मिला.
फिलिस्तीनी न्यूज एजेंसी कुद्स न्यूज नेटवर्क (QNN) ने भी अपने एक्स हैंडल पर यह वीडियो शेयर किया था. वीडियो पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, 'जर्मन पुलिस ने बर्लिन के सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर फिलिस्तीन के समर्थन में एकजुटता दिखा रहे प्रदर्शनकारियों पर हमला किया.'
इसी से संकेत लेकर संबंधित कीवर्ड से सर्च करने पर हमें इस घटना की कई और मीडिया रिपोर्ट भी मिलीं.
जर्मन मीडिया आउटलेट BILD ने 20 दिसंबर 2024 की अपनी रिपोर्ट में इन प्रदर्शनों के बारे में लिखा कि बर्लिन के मुख्य रेलवे स्टेशन (Berliner Hauptbahnhof) पर इजराइल विरोधी प्रदर्शन आयोजित किया गया. इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया.
रिपोर्ट में बताया गया कि इस दौरान फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों ने 'इंतिफादा' (Intifada) का आह्वान किया था. इंतिफादा का अर्थ, इजराइल के खिलाफ विद्रोह से है.
न्यूज आउटलेट Middle East Eye के यूट्यूब चैनल पर भी इस घटना का वीडियो शेयर किया गया. इस वीडियो में भी वायरल वीडियो वाले विजुअल देखे जा सकते हैं.
वीडियो के विवरण में बताया गया कि जर्मन पुलिस ने बर्लिन के मुख्य रेलवे स्टेशन पर नरसंहार-विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की. प्रदर्शनकारियों ने फिलिस्तीनी झंडे लहराए और गाजा में इजराइल के जनसंहार अभियान को समाप्त करने की मांग कर रहे थे.
विवरण में लिखा गया कि जर्मनी फिलिस्तीन समर्थक रैलियों और कार्यकर्ताओं पर कड़े प्रतिबंध लागू कर रहा है और खुले तौर पर इजराइल का समर्थन कर रहा है, जबकि गाजा में हो रही घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से नरसंहार के रूप में मान्यता दी जा रही है.
गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में जर्मनी में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें मिलीं थीं. यह प्रदर्शन गाजा पट्टी में जारी संघर्ष और इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों के विरोध में हो रहे थे. वहीं फरवरी 2024 में भी जर्मन पुलिस द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कार्रवाई करने की खबरें सामने आई हैं.
वीडियो जर्मनी के मैगडेबर्ग की घटना से जोड़कर भी वायरल किया गया
इसके अलावा जांच के दौरान हमने पाया इस वीडियो को जर्मनी के मैगडेबर्ग में 20 दिसंबर 2024 को हुई एक घटना के संदर्भ में भी सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था.
जर्मनी के मैगडेबर्ग में क्रिसमस मार्केट में तेज रफ्तार कार भीड़ में घुस गई थी. इससे पांच लोगों की मौत और कम से कम 60 लोग घायल हो गए थे. पुलिस ने मौके से 50 वर्षीय सऊदी मनोचिकित्सक को गिरफ्तार किया था.
वीडियो के इस गलत दावे से वायरल होने के बाद न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इसका फैक्ट चेक किया था. रॉयटर्स ने बर्लिन पुलिस प्रेस कार्यालय की उप प्रमुख वालेस्का याकूबोव्स्की से संपर्क किया. 27 दिसंबर 2024 को रायटर्स ने किवालेस्का याकूबोव्स्की के हवाले से रिपोर्ट किया कि वायरल वीडियो और मैगडेबर्ग हमले के बीच किसी भी तरह कोई संबंध से नहीं है.