Skip to main content
Boom Live
  • फैक्ट चेक
  • एक्सप्लेनर्स
  • फास्ट चेक
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • बिहार चुनाव 2025
  • वेब स्टोरीज़
  • राजनीति
  • वीडियो
  • Home-icon
    Home
  • Authors-icon
    Authors
  • Careers-icon
    Careers
  • फैक्ट चेक-icon
    फैक्ट चेक
  • एक्सप्लेनर्स-icon
    एक्सप्लेनर्स
  • फास्ट चेक-icon
    फास्ट चेक
  • अंतर्राष्ट्रीय-icon
    अंतर्राष्ट्रीय
  • बिहार चुनाव 2025-icon
    बिहार चुनाव 2025
  • वेब स्टोरीज़-icon
    वेब स्टोरीज़
  • राजनीति-icon
    राजनीति
  • वीडियो-icon
    वीडियो
  1. Home
  2. फैक्ट चेक
  3. दिल्ली पुलिस ने CJP प्रदर्शन में...
फैक्ट चेक

दिल्ली पुलिस ने CJP प्रदर्शन में कील वाली लाठी के असली वीडियो को 'फेक' बताया

बूम ने पाया कि 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोगों को गंभीर छोटे आईं.

By -  Anmol Alphonso & Srijit Das
Published -  22 July 2026 11:23 AM IST
  • Listen to this Article
    Your browser does not support the audio element.
    Protesters display a nail-studded baton during the CJP protest.

    जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया.

    हालांकि दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर हिंसा और हिरासत में लिए जाने की खबरों का खंडन करते हुए एक पोस्ट में कहा कि 'ऐसी कोई घटना नहीं हुई' और दावा किया कि इस प्रदर्शन को 'पेशेवर तरीके' हैंडल किया जा रहा था.

    कुछ मीडिया के हिस्सों ने जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस द्वारा हिंसा/गिरफ्तारी के sporadic उपयोग का उल्लेख किया है।
    यह सूचित किया गया है कि ऐसा कोई घटना नहीं हुई और विरोध को पेशेवर तरीके से संभाला जा रहा है। सभी से अनुरोध है कि किसी भी अफवाह/गलतफहमी का शिकार न हों, और, ...

    — दिल्ली पुलिस (@DelhiPolice) 20 जुलाई, 2026


    दिल्ली पुलिस ने एक अन्य एक्स पोस्ट में कहा कि जिस वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा आरोप लगाया गया है कि उन्हें एक ऐसी लाठी मिली थी जिसमें कीलें लगी हुई थीं, वह वीडियो असंबंधित है और इसे प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड नहीं किया गया.



    बूम ने पड़ताल की तो पाया कि यह वीडियो यूपीएससी अभ्यर्थी उपेंद्र गौड़ द्वारा 20 जुलाई को विरोध प्रदर्शन के दौरान ही रिकॉर्ड किया गया था, जिसे अगले दिन उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया गया.

    गौरतलब है कि 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल से हटा दिया. सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे. यह कार्रवाई उनकी भूख हड़ताल शुरू होने के 20 दिन बाद की गई.

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस ने लाठियों में कीलें लगाई थीं, जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि वीडियो का प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं

    दिल्ली पुलिस ने 21 जुलाई को ऑल्ट न्यूज के संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा साझा किए गए एक वीडियो पर प्रतिक्रिया दी. वीडियो में प्रदर्शनकारी कीलों वाली एक लाठी दिखाते नजर आ रहे थे. जवाब में दिल्ली पुलिस ने इसे 'फेक न्यूज' बताते हुए दावा किया कि इस वीडियो का CJP के विरोध प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है.

    बूम ने इसकी पुष्टि की कि यह वीडियो 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान यूपीएससी अभ्यर्थी उपेंद्र गौड़ द्वारा रिकॉर्ड किया गया था. उपेंद्र गौड़ ने इसे अगले दिन अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था.


    इस पोस्ट को इंस्टाग्राम पर देखें

    गौर उपेंद्र (@gaur_95_com) द्वारा साझा किया गया एक पोस्ट


    उपेंद्र गौड़ ने बूम को बताया, "मैं वहां मौजूद था और मैंने ही यह वीडियो शूट किया था. इसे जनपथ मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 3 के बाहर चौराहे पर रिकॉर्ड किया गया था. पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को पीट रही थी तो हमने देखा कि एक लाठी में कीलें लगी हुई थीं. वहां हमने कुछ लड़कियों को भी देखा जो घायल अवस्था में थीं."


    इसके अलावा हमने एक अन्य प्रदर्शनकारी से भी संपर्क किया, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच लाठीचार्ज का वीडियो दूसरे एंगल से रिकॉर्ड किया था. बूम नाबालिग होने के कारण इस प्रदर्शनकारी की पहचान उजागर नहीं कर रहा है.

    हमने इस लंबे वीडियो का मेटाडेटा विश्लेषण किया जिसमें पता चला कि इसे 20 जुलाई 2026 को 16.33 में शूट किया गया था. मेटाडेटा नीचे देख सकते हैं.



    बूम को इस वीडियो का लंबा वर्जन उस प्रदर्शनकारी द्वारा उपलब्ध कराया गया था जो उस वक्त राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की बिल्डिंग, 36 जनपथ, नई दिल्ली के सामने मौजूद था.

    हमने मेटाडेटा व्यू का इस्तेमाल करके वीडियो के GPS कोऑर्डिनेट्स निकाले और पाया कि वे उस स्थान से मेल खाते हैं जहां विरोध प्रदर्शन के ये वीडियो रिकॉर्ड किए गए थे.

    उस कील वाली लाठी को 40 सेकंड के टाइमस्टैम्प पर देखा जा सकता है.


    पीआईबी की फैक्ट चेक इकाई द्वारा भी इस दावे को फेक बताया गया है.

    ये वीडियो स्थापित करते हैं कि फुटेज प्रदर्शन स्थल के पास ही रिकॉर्ड किया गया था. हालांकि वे स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं करते कि लाठी में कीलें किसने लगाईं या इसका इस्तेमाल पुलिसकर्मियों द्वारा किया गया था या नहीं.

    जंतर-मंतर पर हिंसा या गिरफ्तारी नहीं हुई : दिल्ली पुलिस

    मौके पर मौजूद पत्रकारों ने किया पुलिस के दावों का खंडन

    बूम ने मॉलिटिक्स के संपादक नीरज झा से संपर्क किया, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था. नीरज झा ने बूम को बताया कि उन्होंने पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर हमला करते हुए देखा, इस दौरान उनके कैमरामैन को भी चोट लगी. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बाद में उन्हें एक पुलिस वैन में धकेल दिया और उन्हें बुराड़ी पुलिस स्टेशन ले गए.

    उन्होंने कहा, "मैंने अपने फोन पर रिकॉर्डिंग शुरू कर दी. हालांकि मैंने खुद को पत्रकार बताया फिर भी पुलिस अधिकारियों ने मेरे साथ बदसलूकी करने की कोशिश की. बाद में दो अधिकारियों ने मुझे एक वैन में धकेल दिया और अपने साथ ले गए."

    नीरज झा को लगभग ढाई बजे कृषि भवन के पास उठाया गया और पहले बुराड़ी पुलिस स्टेशन ले जाया गया. फिर बाद में उन्हें छत्रसाल स्टेडियम में ले जाया गया.

    बूम की जगृति तृषा भी प्रोटेस्ट साइट के पास मौजूद थीं और उन्होंने पुलिस कार्रवाई देखी. उन्होंने बताया, "प्रोटेस्ट साइट की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर कई लेयर्स में बैरिकेडिंग की गई थी, जहां रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस भारी संख्या में तैनात थी. हमने कई प्रदर्शनकारियों से बात की जिन्होंने बताया कि उन पर लाठीचार्ज किया गया है. हमने देखा कि कई लोगों के पैरों में चोटें आई थीं, कुछ के पैरों के नाखून तक उखड़ गए थे, वहीं कुछ के सिर में गंभीर चोटें थीं."

    DECODE की हेरा रिजवान ने भी रोहिणी के एक एसएससी अभ्यर्थी से बात की, जिसने बताया कि पुलिस की ओर से बिना किसी चेतावनी या स्पष्ट निर्देश के बार-बार लाठीचार्ज किया गया.

    कई वीडियो में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई देखी जा सकती है

    बूम ने विरोध प्रदर्शन के कई वीडियो का रिव्यू किया, जिसमें पुलिसकर्मियों को महिलाओं और नाबालिगों समेत कई प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते हुए दिखाया गया है.

    ट्रिगर वार्निंग: वीडियो में परेशान करने वाले विजुअल और अपशब्द शामिल हैं.

    दिल्ली पुलिस 16 वर्षीय बच्चे को पीट रही है।

    वह हिल गया है। आघात।

    प्रदर्शनकारियों को बर्बरता से लाठीचार्ज किया गया।

    थ्रेड का पालन करें pic.twitter.com/oCLfhpsTyV

    — पार्थ एमएन (@parthpunter) 20 जुलाई, 2026


    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 10 साल के लड़के को थप्पड़ मारा। pic.twitter.com/OpKVRWg7oS

    — कॉकरोच वापस आ गया है (@Cockroachisback) 21 जुलाई, 2026


    "मारो मदरचोदों को।" - दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने के दौरान। pic.twitter.com/AeqJa3yNI7

    — शुभ (@kadaipaneeeer) 20 जुलाई, 2026


    संदीप लांबा, दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त डीसीपी, कैमरे पर एक लड़की को थप्पड़ मारते हुए।

    एक पुरुष पुलिस अधिकारी एक महिला प्रदर्शनकारी को छूने के लिए कैसे सक्षम हो सकता है, उसे थप्पड़ मारने की बात तो छोड़ दें?

    मुझे उम्मीद है कि कोई इस घमंडी व्यक्ति पर मुकदमा करेगा। #CJPProtestspic.twitter.com/ttkgBicfZR

    — जसविंदर कौर (@TheReal_Jassi) 21 जुलाई, 2026



    एडिशनल इनपुट- जागृति तृषा (बूम हिंदी)

    Tags

    Cockroach Janta PartyJantar Mantar Delhi
    Read Full Article
    Next Story
    Our website is made possible by displaying online advertisements to our visitors.
    Please consider supporting us by disabling your ad blocker. Please reload after ad blocker is disabled.
    X
    Or, Subscribe to receive latest news via email
    Subscribed Successfully...
    Copy HTMLHTML is copied!
    There's no data to copy!