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‘दहेज के लाभ’: वायरल तस्वीर गुजरात बोर्ड की टेक्स्टबुक से नहीं है

‘दहेज के लाभ’: वायरल तस्वीर गुजरात बोर्ड की टेक्स्टबुक से नहीं है

बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर अक्टूबर 2017 में एक बेंगलुरु कॉलेज द्वारा वितरित अध्ययन सामग्री की थी

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कई ट्विटर यूज़र ने सोमवार को टेक्स्टबुक के पेज की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें दहेज के ‘फ़ायदे’ को सूचीबद्ध किया गया था। तस्वरी के साथ ग़लत दावा किया गया था कि यह गुजरात में सोशल साइंस की टेक्स्टबुक का एक अंश है। स्क्रीनशॉट वास्तव में अध्ययन सामग्री से है जिसे अक्टूबर 2017 में बेंगलुरु कॉलेज में समाजशास्त्र के छात्रों को दिया गया था और जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया था।

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने कैप्शन के साथ तस्वीर को ट्वीट किया जिसमें लिखा था, “गुजरात मॉडल का बदसूरत प्रदर्शन …बच्चों को “दहेज के फायदे” पढ़ाना ..सोशल साइंस के टेक्स्टबुक का अंश महिला सशक्तिकरण के बारे में भाजपा का विचार है। हम @CMOGuj को दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 और आईपीसी 498A की याद दिलाना चाहते हैं कि अपराध संज्ञेय, गैर-यौगिक और गैर-जमानती है।”

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( एआईएमसी का ट्वीट )

ट्वीट देखने के लिए यहां क्लिक करें, और अर्काइव के लिए यहां देखें।

अब हटा दिए गए एक ट्वीट में तस्वीर गौरी लंकेश की बहन कविता लंकेश के ट्वीट करने के बाद वायरल हो गई थी उन्होंने इसे कैप्शन के साथ ट्वीट किया था जिसमें लिखा था, “महिला सशक्तीकरण? बकवास! गुजरात शिक्षा बोर्ड के लिए एक सामाजिक विज्ञान पुस्तक का एक पृष्ठ। यह बकवास पूरे गुजरात के लाखों बच्चों को सिखाया जा रहा है।”

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( ट्वीट अब हटा दिया गया है)

अर्काइव देखने के लिए यहां देखें।

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फ़ैक्ट चेक

कीवर्ड ‘दहेज’ और ‘टेक्स्टबुक’ के साथ एक सरल खोज से हम 21 अक्टूबर, 2017 के टाइम्स ऑफ इंडिया के एक लेख तक पहुंचे, जिसमें बताया गया था कि यह पेज बेंगलुरु कॉलेज द्वारा वितरित अध्ययन सामग्री से था।

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( टाइम्स ऑफ इंडिया का लेख )

लेख में बताया गया कि बेंगलुरु के सेंट जोसेफ कॉलेज में समाजशास्त्र के बैच में साठ छात्रों ने दाखिला लिया, जिन्हें देश में ‘दहेज के ख़तरे’ के बारे में अध्ययन सामग्री वितरित की गई है। ‘दहेज के लाभ’ के तहत, शुरु किए गए टेक्स्ट बताया गया है कि दहेज बुरी प्रथा के रूप में स्वीकार किया जाता है और इसके समर्थक इस रिवाज को बनाए रखना चाहते हैं और बाद में दहेज के “लाभ” की सूची बताई जाती है, जैसा कि इसके समर्थक मानते हैं। न्यूज़ मिनट ने बताया था कि कॉलेज प्रशासन ने शुरू में इनकार कर दिया था कि कॉलेज ने अध्ययन सामग्री वितरित की थी, लेकिन बाद में मीडिया को एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया था कि ‘मामले की जांच की जा रही है’ और वे समस्या की जड़ खोजने की कोशिश कर रहे हैं।’

दहेज निषेध अधिनियम 1 मई, 1961 को लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य दहेज देने या लेने से रोकना है। अधिनियम के तहत दहेज में किसी भी पार्टी द्वारा या पार्टी के माता-पिता द्वारा या विवाह के संबंध में किसी और के द्वारा शादी के लिए संपत्ति, माल, या पैसा शामिल है।

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Claim Review : गुजरात बोर्ड की किताब में दहेज़ के लाभ पढ़ाए जा रहे हैं

Fact Check : FALSE

Anmol Alphonso is a fact-checker with BOOM. He has previously interned at IndiaSpend as a fact-checker and was a reporting intern at Times of India, Indian Express, and Mid-Day. He is a post-graduate diploma holder in journalism from St Paul’s Institute of Communication Education, Mumbai.

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