कश्मीर में 2017 में हुए छात्रों के विरोध को बताया जा रहा है हालिया घटना

वायरल वीडियो अनुच्छेद 370 के कश्मीर से हटने के बाद की स्थितियों के साथ पुराने विरोध की घटनाओं को जोड़ता है
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कश्मीर का एक पुराना वीडियो धारा 370 और 35 ए को निरस्त करने के बाद घाटी में अशांति दिखाने के उद्देश्य से भ्रामक दावे के साथ ऑनलाइन फैलाया जा रहा है।

बूम ने पाया कि मूल वीडियो एक छात्र के विरोध प्रदर्शनों से था जिसने 2017 में घाटी को हिलाकर रख दिया था।

वीडियो के साथ दिए गए शीर्षक में लिखा है, “कश्मीर जल रहा है। मोदी और शाह दुनिया को दिखाने नहीं दे रहें हैं आप दिखाये कम से कम दुनिया को बताएं। ये ज़ालिम ज़ुल्म की इन्तेहाँ कर रहे हैं।”

वायरल क्लिप को नीचे देखा जा सकता है और इसके अर्काइव्ड वर्शन तक यहां से पहुंचा जा सकता है।

कई फ़ेसबुक पेजों पर शेयर की गई इस वायरल क्लिप में सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों के साथ धुएं के बम से मुकाबला करते अलग-अलग दृश्य दिखाए गए हैं। साथ ही वीडियो में 'आज़ादी' का नारा लगाते स्कूल के छात्रों को पुलिसकर्मियों के साथ बहस करते भी देखा जा सकता है।

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फ़ैक्ट चेक

वायरल क्लिप में ऊपरी दाहिने कोने पर राइजिंग कश्मीर का प्रतीक चिन्ह है।

कश्मीरी वेबसाइट के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो की जांच के दौरान हमें उसी क्लिप का एक लंबा वर्शन मिला। छह मिनट लंबे इस वीडियो के साथ एक वर्णन में लिखा है, 'छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने कश्मीर घाटी को हिला दिया।'



वीडियो को 17 अप्रैल, 2017 को आरके नामक यूट्यूब पेज पर प्रकाशित किया गया था।

वर्ष 2017 में बहुत उथल-पुथल देखने को मिली थी। जैसा कि पूरे कश्मीर में छात्र भारतीय सशस्त्र बलों के कथित अत्याचारों के ख़िलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। कश्मीर में 2017 के छात्रों के विरोध के बारे में यहां पढ़ें।

जबकि वायरल क्लिप और यूट्यूब वीडियो में दिखाए गए दृश्य समान क्रम में नहीं हैं, लेकिन घटनाएं एक ही हैं। बूम ने स्क्रीनशॉट से वायरल वीडियो और मूल वीडियो दोनों की तुलना की है।

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वायरल क्लिप और मूल वीडियो से दृश्यों की तुलना
Claim Review :   भाजपा भारतीय सेना द्वारा कश्मीरियों पर की जा रही प्रताड़ना को लोगों तक नहीं पहुंचने दे रही
Claimed By :  Facebook Pages
Fact Check :  False
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