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हमारे बारे में

बूम डिजिटल पत्रकारिता की एक स्वतंत्र पहल है | हम भारत की एक प्रमुख फैक्ट चेकिंग वेबसाइट हैं जो अपने पाठकों तक जांचे हुए तथ्य, ना की प्रचलित राय, लाने के प्रतिबद्ध हैं | जहां कोई दावा किया गया है, हम वहाँ तथ्यों की जांच करेंगे | हम अक्सर उन रिपोर्ट्स या लोगों पर काम कर रहे होते हैं जो किसी व्यक्ति-विशेष के हक़ के लिए या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे होते हैं | और जब हम इन गंभीर मसलो पर नहीं लगे होते तो आपके लिए लाते हैं कुछ ‘कूल’ फैक्ट चेक्स |

बूम अभिन्न हिस्सा है पिंग डिजिटल नेटवर्क (www.pingnetwork.in) का, जो की भारत में रजिस्टर्ड एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है | पिंग पूर्णतयः खाने से लेकर रहन-सहन के तौर तरीकों का डिजिटल वीडियो नेटवर्क है | वर्ष 2014 से अस्तित्व में आया बूम इस नेटवर्क का न्यूज़ डिवीज़न है | नवंबर 2016 से बूम पूर्णतयः एक फैक्ट चेकिंग पहल के तौर पर काम कर रहा है|

 

अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणीकरण

 

बूम भारत और दक्षिण एशिया के सिर्फ दो फैक्ट चेकर्स (उसी संस्थापक द्वारा आरम्भ किया गया (www.factchecker.in) में से एक है जिन्हे इंटरनेशनल फैक्ट चेकिंग नेटवर्क – पोय्न्टर इंस्टिट्यूट ने प्रमाणित किया है | यह प्रमाणीकरण हमारे द्वारा संपादकीय रूप से मजबूत और स्वंतंत्र फैक्ट चेकिंग वेबसाइट की संरचना तैयार करने के लिए उठाये गए शुरुआती कदमों की झलक दिखाती है |

यहाँ मौजूद लिंक आपको हमारे प्रमाणीकरण और उससे जुड़े प्रक्रिया के बारे में संपूर्ण जानकारी देगा | https://www.poynter.org/international-fact-checking-network-fact-checkers-code-principles

 

प्रक्रिया

 

1.फैक्ट चेक करने के लिए दावा चुनना |

 

हम काफी सक्रियता के साथ सोशल मीडिया, खासकर राजनीतिज्ञों या सत्ताधारियों के द्वारा जनता में दिए गए बयानों पर नज़र रखते हैं | हमारे रीडर्स भी हमारे व्हाट्सएप्प हॉटलाइन नंबर (7700906111) पर हमें वो वायरल संदेश फॉरवर्ड कर सकते हैं जिनकी वो जांच करवाना चाहते हैं |

साथ ही अक्सर हमारे रीडर्स हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पोस्ट्स फैक्ट चेक करने के लिए टैग करते हैं | किसी भी दावें का चुनाव हम कई कारणों के आधार पर करते हैं | मसलन, क्या ये दिलचस्प है ? क्या ये एक बड़ी संख्या में लोगों पर असर करता है ? क्या विषय-वस्तु उकसाने या सनसनी फ़ैलाने वाला है और अगर इसे चेक ना किया गया तो क्या ये लोगों को नुक्सान पहुंचा सकता है ?

 

2. दावे के सूत्र का पता लगाना

 

फैक्ट चेक करने के लिए दावा लक्ष्य कर लेने के बाद हम ये पता लगाते हैं की दावे की शुरुवात कहाँ से हुई है | अक्सर सूत्र ये साबित करने में एक अहम् भूमिका निभाता है की दावा भरोसे के लायक है या नहीं | मसलन, न्यूज़ रिपोर्ट्स के लिए हम पहले पता लगते हैं की दावा भरोसेमंद वेबसाइट से है या नहीं | तस्वीरों के मामलें में हम अक्सर गूगल रिवर्स इमेज सर्च से ये पता लगाने की कोशिश करते हैं की क्या तस्वीर पुराणी है या उसस्के साथ किसी प्रकार की छेड़-छड़ की गयी है या फिर उसका इस्तेमाल गलत सन्दर्भ में किया गया है | वो मामले जहां दावा सिंगल सोर्स या प्रत्यक्षदर्शी के ब्योरों पर टिका होता है, हम यह जानने की कोशिश करते हैं की क्या दावेदार की पहुँच ऐसी खबरों तक है |

 

3. सूत्र से संपर्क करना

 

ऐसे दावें जिनमें लोकप्रिय हस्तियों का ज़िक्र हो, हम उस व्यक्ति-विशेष या उसके ऑफिस को संपर्क करते हैं ताकि सिक्के का दूसरा पहलु भी पता चल सके | हम वीडियोस या सार्वजनिक रूप से मौजूद ट्रांसक्रिप्ट्स की मदद से भी ये पता लगाने की कोशिस करते हैं की आखिर कहा क्या गया था और किस सन्दर्भ इ कहा गया था | रेपर्टस या डाटा पॉइंट्स के मामलों में हम उस संस्था से संपर्क बिठाने की कोशिश करते हैं जिसने रिपोर्ट्स पब्लिश की थी |

 

4. दावे को बर्खास्त करते प्रमाण या सुराग की तलाश

 

उक्त मामले के सन्दर्भ में सार्वजनिक रूप से उपलब्द्ध साधनों की ख़ोज भी हमारी प्रक्रिया में शामिल है | हम उस मामले पर लिखे गए पुराने लेखों की भी छानबीन करते हैं | हम गवर्नमेंट डाटा बेस, ग्लोबल थिंक टैंक्स, अनुसंधान संघों, और अन्य विश्वसनीय सूत्रों के पास मौजूद डाटा की तलाश करते हैं | और अगर हमें ज़रूरी डाटा ना मिले, तो हम इसे अपनी वेबसाइट पर साफ़ साफ़ कहते हैं |

 

5. हम अपनी गलतियों को तुरंत सुधारते हैं

 

बूम रियल टाइम में फ़ेक न्यूज़ की पोल खोलने को प्रतिबद्ध है | हम ये मानते हैं की ऐसा करते वक्त कभी कभार हमसे गलतियाँ भी हो सकती हैं | और अगर हमसे गलतियां होती हैं तब हम शर्मशार हो कर अपनी गलतियाँ छुपाते नहीं बल्कि अपने रिपोर्ट को तुरंत सुधारते हैं और सुधार की खबर अपने रीडर्स को भी देते हैं | सुधारे गए रिपोर्ट्स के साथ एक एडवाइजरी भी होती है | बूम फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी सक्रिय है | हम तर्कसंगत फीडबैक और विवेचना का स्वागत करते हैं |

 

6. एक्सपर्ट्स से सलाह लेना

 

बूम ऐसा दावा कतई नहीं करता की हम हर मामले में दक्ष हैं | अक्सर हम किसी ख़ास क्षेत्र के एक्सपर्ट्स के जानकारी की मदद लेते हैं | हम कोशिश करते हैं की सूत्रों पर आधारित रिपोर्ट्स पर काम ना ही करें और सिर्फ उन्हें क्वोट करते हैं जो ऑन-रिकॉर्ड बोलना चाहते हों |

 

7. फैक्ट चेक लिखना

 

हम अपने रिपोर्ट्स उपरोक्त बताये गए तरीकों का इस्तेमाल कर के ही लिखते हैं | अपने रिपोर्ट्स में बताये गए सूत्रों तक पहुँचने के लिंक्स भी हम अपने रीडर्स को देते हैं | उन मामलों में जिनमें हम किसी दावे का कोई निष्कर्ष नहीं निकाल पाते, हम खुलकर अपनी वेबसाइट में बताते हैं और दावे की जांच में इस्तेमाल की गयी विधि को विस्तार से लिखते हैं |

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